धर्म और अध्यात्म

Holi 2026 Dates Confirmed : रंग वाली होली की तारीख हुई कन्फर्म, इस दिन खेली जाएगी धुलंडी

Holi 2026 Dates Confirmed : होली 2026 की तारीख हो गई है कन्फर्म। जानिए कब होगा होलिका दहन, कब खेली जाएगी रंगों वाली होली और ग्रहण का क्या होगा असर।

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Feb 23, 2026
Holi 2026 Dates: 4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली, जानिए पूरी जानकारी (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Holi 2026 Dates Confirmed : सर्दियों की विदाई और गुलाल की खुशबू के साथ साल का सबसे रंगीन त्योहार होली बस आने ही वाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल 2026 की होली पिछले सालों से थोड़ी अलग होने वाली है? इस बार केवल रंग और गुजिया ही नहीं, बल्कि आसमान में लगने वाला चंद्र ग्रहण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर आप भी कन्फ्यूज हैं कि रंगों वाली होली कब खेली जाएगी, तो अपनी डायरी निकाल लीजिए और ये तारीखें नोट कर लीजिए।

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कब है रंगों वाली मस्ती? (Holi 2026 Dates)

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा के अगले दिन यानी चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को धुलंडी मनाई जाती है।

होलिका दहन: 3 मार्च 2026, मंगलवार

धुलंडी (रंगों वाली होली): 4 मार्च 2026, बुधवार

इस साल 4 मार्च को पूरा देश रंगों के सराबोर होगा। लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाएंगे और घर-घर में ठंडाई और दही-भल्लों का दौर चलेगा।

होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया | Holika Dahan and Dhulandi Dates with Lunar Eclipse Impact

साल 2026 की होली इसलिए खास है क्योंकि 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल होलिका दहन की पूजा को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में शुभ मुहूर्त में ही पूजा करना फलदायी होगा।

जब भी होली पर ग्रहण का योग बनता है, तो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए होलिका की राख को घर के कोनों में छिड़कना और अगले दिन स्नान के बाद दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

ब्रज की होली: जहां लट्ठ और गुलाल का संगम है

होली की बात हो और कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन का जिक्र न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। ब्रज में होली सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलती है:

बरसाना की लट्ठमार होली: यहां की महिलाएं लाठियों से पुरुषों को मारती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।

फूलों वाली होली: वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में रंगों की जगह फूलों की बारिश होती है।

दक्षिण भारत का काम-दहनम्: जहां उत्तर भारत में प्रह्लाद की जीत का जश्न मनाया जाता है, वहीं दक्षिण में इसे कामदेव के पुनर्जन्म और त्याग के रूप में मनाया जाता है।

क्यों मनाते हैं यह त्योहार?

यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद को जलाने की कोशिश करने वाली होलिका खुद जलकर राख हो गई थी, लेकिन विष्णु भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। यही विश्वास हमें सिखाता है कि सत्य हमेशा जीतता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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