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पति की ये 5 गलतियां बर्बाद कर सकती है परिवार! शास्त्रों के अनुसार, पति के कर्तव्य क्या हैं?

Husband's Responsibilties for Wife: पति-पत्नी के झगड़ें क्यों होते हैं? के अपनी पत्नी के प्रति कर्तव्य क्या होते हैं? इस आर्टिकल में शास्त्रों से समझिए।

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Jan 12, 2026
Husband-Wife Conflict Solution: पति-पत्नी के झगड़ों का समाधान शास्त्रों से समझें। (छविः एआई)

PATI ke Kartavya PATNI ke liye: हिंदू शास्त्रों के अनुसार गृहस्थाश्रम में पति की भूमिका बहुत अहम होती है। मनुस्मृति और वेदों में पति के पांच मुख्य कर्तव्य तय किए गए हैं। इन कर्तव्यों का पालन न करने पर पति-पत्नी में कलह होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है, कि हसबैंड-वाइफ के झगड़ों का मूल कारण और समाधान क्या है?

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पति-पत्नी के झगड़ों के कारण? | Husband-Wife Conflict Resolution

  • बातचीत एवं समझ की कमी: अपनी बात स्पष्ट न कह पाना, एक-दूसरे को न सुनना और गलतफहमियां पालना विवाद की सबसे बड़ी जड़ बनता है।
  • अपेक्षाएं और अहंकार: एक-दूसरे से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखना और 'मैं ही सही हूं' वाले एटीट्यूड के कारण आपसी तालमेल बिगड़ जाता है।
  • आर्थिक व बाहरी दबाव: पैसों के मैनेजमेंट पर असहमति और परिवार या दोस्तों का जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप तनाव की वजह बनता है।
  • जुड़ाव का अभाव: शारीरिक और भावनात्मक दूरी, एक-दूसरे के निजी स्पेस (Personal Space) का सम्मान न करना रिश्तों में कड़वाहट घोल देता है।
  • जीवनशैली: आदतों और रहन-सहन के तौर-तरीकें अलग होना भी छोटे-बड़े मनमुटाव पैदा कर सकता है।

पति-पत्नी के झगड़ों का समाधान | Happy Married Life Tips in Hindi

पति-पत्नी के बीच झगड़ा न हो, इसलिए कई बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। शांत रहना, गहरी सांस लेना, विषय बदलना, प्यार से बात करना और माफी मांगना बहुत जरूरी है। साथ ही एक-दूसरे को समझना, साथ में समय बिताना, और समस्याओं पर सोचने के बजाय एकजुट होकर काम करना रिश्ते को मजबूत बनाता है। यदि स्थिति गंभीर हो तो, एक्सपर्ट की मदद लेने में संकोच नहीं करें। एक्सपर्ट्स के अनुसार, थोड़ा-सा झुकने, अपनी गलती मानने और माफी मांगने से मसले सुलझ जाते हैं।

झगड़े के दौरान क्या करें | Husband Wife Conflict Solution

  1. शांत रहें: तुरंत जवाब न दें, 10-15 मिनट चुप रहें, गहरी सांस लें।
  2. माहौल बदलें: टॉपिक चेंज करें। कुछ देर के लिए अलग हो जाएं, गुस्सा कम होने पर प्यार से बात करने की कोशिश करें।
  3. प्यार से बात करें: "चलो आराम से बात करते हैं", "मैं समझने और अपनी गलती मानने को तैयार हूं", " मैं तुम्हारी बात मानूंगा" जैसे वाक्य बोलें।
  4. स्पर्श या पास बैठना: माना जाता है कि, हाथ पकड़ना, गले लगाना और पास बैठना गुस्से को कम कर देता है।
  5. माफी मांगें: अपनी गलती मानकर, रिश्ते को बचाने के लिए माफी मांगे, चाहे आपकी गलती न हो। झगड़ा सुलझने पर बातचीत करें। फिर, समझाने पर सामने वाले को अपनी गलती रिलाइज हो जाती है।

शास्त्रों ने गृहस्थाश्रम में पति और पत्नी को एक इकाई के दो अभिन्न अंग माना है। पत्नी को अर्धांगिनी (आधा अंग) और गृहलक्ष्मी बताया गया है। वहीं पति के लिए भी बेहद जरूरी और गंभीर कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं।

पति के क्या कर्तव्य हैं? | What is Husbands Roles and Responsibilties

1. भरण-पोषण और आर्थिक सुरक्षा | Maintenance and financial security

मनुस्मृति (9.95) के अनुसार, पति अपनी पत्नी का भरण-पोषण हर स्थिति में करें। पति का पहला कर्तव्य पत्नी और परिवार को भोजन, वस्त्र, और आवास के साथ अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध करवाना है।

  • अथर्ववेद (6.81.1): पति को एक अनुशासित जीवन जीना चाहिए और अपने विवाहित जीवन को चलाने के लिए धन अर्जित करने के लिए काबिल बननना चाहिए।

2. पत्नी की रक्षा | Wife's Protection

मनुस्मृति (9.12) में कहा गया है, पति को अपनी पत्नी की रक्षा हर हाल में करनी चाहिए। पत्नी की रक्षा करके ही वह अपनी संतान, चरित्र, कुल और स्वयं की रक्षा करता है।

  • भावार्थ: रक्षा का अर्थ मानसिक संताप और पीड़ाओं से बचाने के साथ ही घर में सम्मानजनक वातावरण देने से है।

3. सम्मान और प्रसन्नता (Honour and Happiness)

शास्त्रों का मत है कि जिस घर में स्त्रियां दुखी रहती हैं, वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।

मनुस्मृति (3.56):यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ॥ अर्थात् जहां नारियों की पूजा और सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं। जहां स्त्रियों का सम्मान नहीं होता, वहां किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती।

  • मनुस्मृति (3.60): जिस कुल में पति अपनी पत्नी से और पत्नी अपने पति से संतुष्ट रहती है, उस कुल में निश्चित ही कल्याण और सौभाग्य रहता है।

4. निष्ठा और प्रेम (Faithfulness)

पति के लिए 'एकपत्नी व्रत' का पालन करना आदर्श माना गया है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन से यही मिसाल दी।

  • अथर्ववेद (7.37.1) के अनुसार, पति को कभी भी पत्नी के अलावा दूसरी स्त्री के बारे में विचार नहीं करना चाहिए। केवल अपनी पत्नी को ही प्रेम की दृष्टि से देखना चाहिए।

5. धार्मिक और आध्यात्मिक सहभागिता | Religious & Spiritual Support

विवाह के समय पति संकल्प लेता है कि वह धर्म, अर्थ और काम के मामलों में अपनी पत्नी को साथ रखेगा।

  • संदर्भ: शास्त्रों में पत्नी को 'धर्मपत्नी' कहा गया है। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पत्नी के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम ने भी अश्वमेध यज्ञ के समय माता सीता की स्वर्ण प्रतिमा रखी थी। पति का ये भी कर्तव्य है कि वह आध्यात्मिक और सांसारिक उन्नति में पत्नी का मार्गदर्शन और मदद करे।

पति के क्या कर्तव्य हैं? | Husband's Duties for Wife

कर्तव्यविवरण
भरण-पोषणभोजन, वस्त्र और सुख-सुविधाओं की व्यवस्था करना।
सुरक्षाशारीरिक रक्षा के साथ-साथ पत्नी के मान-सम्मान की रक्षा करना।
समानतापत्नी को घर की 'सम्राज्ञी' (महारानी) के रूप में सम्मान देना।
पारदर्शिताअथर्ववेद (2.30.4) के अनुसार, पति को अपनी पत्नी से कुछ भी छिपाना नहीं चाहिए।
संयमक्रोध का त्याग करना और मधुर व्यवहार करना।

इन कर्तव्यों को फॉलो कर आप अपनी मैरिड लाइफ को खूबसूरत, शांतिमय और सुकून-भरी बना सकते हैं।

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Published on:
12 Jan 2026 04:56 pm
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