धर्म और अध्यात्म

Khatu Shyam Mandir 19 घंटे बंद रहेगा, 20 मई शाम 5 बजे बाद होंगे बाबा श्याम के दर्शन, जानें क्या है विशेष तिलक सेवा

Khatu Shyam Mandir: खाटूश्यामजी मंदिर में बाबा श्याम की पारंपरिक तिलक सेवा के कारण 19 घंटे तक श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं मिलेंगे। यात्रा से पहले जान लें मंदिर प्रशासन का पूरा शेड्यूल और दर्शन का सही समय।

3 min read
May 18, 2026
Khatu Shyam Mandir Darshan Update : खाटूश्यामजी में 19 घंटे बंद रहेंगे पट, जानें कब मिलेंगे बाबा श्याम के दर्शन

Khatu Shyam Mandir Darshan Update : खाटूश्यामजी मंदिर में 19 मई की रात 10 बजे से बाबा श्याम (Khatu Shyam Mandir) के दर्शन बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने विशेष तिलक सेवा और पारंपरिक श्रृंगार प्रक्रिया के चलते 20 मई शाम 5 बजे तक कपाट बंद रखने का फैसला लिया है। ऐसे में इस दौरान दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बाहर से ही शीश नवाना पड़ेगा। मई की भीषण गर्मी और संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी ने भक्तों से यात्रा का समय बदलने की अपील भी की है।

ये भी पढ़ें

Shani Gochar 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का गोचर धन, करियर और निवेश के लिए क्यों खास है

क्यों और कब बंद रहेंगे बाबा के कपाट?

खाटूश्याम मंदिर कमेटी के मुताबिक, बाबा श्याम की विशेष सेवा-पूजा, तिलक और दिव्य श्रृंगार प्रक्रिया के चलते मंदिर के पट कुल 19 घंटों के लिए आम जनता के लिए बंद किए जा रहे हैं।

मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि:

कपाट बंद होने का समय: 19 मई की रात 10:00 बजे से
कपाट खुलने का समय: 20 मई की शाम 5:00 बजे तक

इस निर्धारित अवधि के दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए 'दर्शन' पूरी तरह से वर्जित रहेंगे। ऐसे में यदि आप इस दौरान मंदिर परिसर पहुंचते हैं, तो आपको केवल बाहर से ही शीश नवाना होगा।

क्या है बाबा श्याम की विशेष तिलक सेवा

खाटूश्यामजी में हर महीने बाबा के विशेष तिलक और श्रृंगार की एक बेहद पवित्र और पारंपरिक प्रक्रिया निभाई जाती है। यह कोई आम श्रृंगार नहीं होता, बल्कि इसके पीछे सदियों पुराना विधि-विधान और गहरी आस्था जुड़ी है। हर महीने होने वाली इस पारंपरिक सेवा को देखने और उसके बाद दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु खाटूधाम पहुंचते हैं।

शाही स्नान और गर्भगृह की शुद्धि: कपाट बंद होने के बाद सबसे पहले पूरे गर्भगृह को साफ और पवित्र किया जाता है। इसके बाद बाबा श्याम के शीश को विशेष जड़ी-बूटियों, गंगाजल और दूध से शाही स्नान कराया जाता है।

विशेष चंदन और इत्र का लेप: स्नान के बाद मुख्य पुजारियों द्वारा बाबा के मुख मंडल पर एक खास प्रकार के चंदन, केसर, कस्तूरी और कई तरह के प्राकृतिक सुगंधित द्रव्यों (इत्र) का लेप लगाया जाता है। इस पारंपरिक लेप को तैयार करने और उसे बाबा के विग्रह पर लगाने में ही 4 से 5 घंटे का लंबा समय लगता है।

अमावस्या का खास नियम: इस तिलक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार यह लेप लगने के बाद, अगली अमावस्या तक बाबा के मुख्य विग्रह के श्रृंगार में कोई बदलाव नहीं किया जाता। यह लेप उनके स्वरूप को सुरक्षित और चमकीला बनाए रखता है।

दो अलौकिक स्वरूपों के दर्शन: इस पूरी प्रक्रिया की वजह से भक्तों को महीने में बाबा के दो अद्भुत रूपों के दर्शन होते हैं। पहला 'कृष्ण स्वरूप' (जो गहरे रंग में दिखता है) और दूसरा इस पारंपरिक तिलक सेवा के बाद निखरा हुआ 'सजीला और भव्य स्वरूप'।

श्रद्धालुओं के लिए मंदिर कमेटी की जरूरी सलाह

इस निर्धारित 19 घंटों की अवधि में केवल प्रधान पुजारी और सेवा से जुड़े लोग ही गर्भगृह में मौजूद रहते हैं।

यात्रा को करें री-शेड्यूल: यदि आपका प्लान 19 मई की रात या 20 मई की दोपहर का है, तो उसे बदल लें। 20 मई की शाम 5 बजे के बाद ही दर्शन सुचारू रूप से शुरू हो पाएंगे।

भीषण गर्मी का रखें ध्यान: मई के महीने में राजस्थान में कड़ाके की धूप और लू का प्रकोप रहता है। पट खुलने के बाद मंदिर में अचानक भीड़ उमड़ सकती है, इसलिए अपने साथ पानी की बोतल, ओआरएस और छाता जरूर रखें।

बाबा श्याम का यह स्वरूप तिलक के बाद और भी दिव्य नजर आता है। तो बस, अपनी आस्था के साथ थोड़ा संयम जोड़िए और इस समय सारणी को ध्यान में रखकर ही हारे के सहारे के दरबार में अपनी हाजिरी लगाइए।

ये भी पढ़ें

Saptahik Rashifal 18-24 May 2026: इन 5 राशियों को मिल सकता है धन लाभ, करियर में तरक्की के योग
Published on:
18 May 2026 12:49 pm
Also Read
View All