
Mallikarjuna Temple History: आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम (Srisailam Temple) में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां हर अमावस्या (Amavasya Shiva Worship) को भगवान शिव और पूर्णिमा पर माता पार्वती साक्षात विराजमान होते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर का संबंध केवल शिवभक्ति ही नहीं, बल्कि शक्तिपीठ परंपरा से भी जोड़ा जाता है। नल्लामलाई पहाड़ियों और कृष्णा नदी के बीच बसे इस तीर्थ की पौराणिक कथाएं इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण शिवधामों में शामिल करती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान गणेश का विवाह कार्तिकेय (मुरुगन) से पहले हो गया, तो कुमार कार्तिकेय नाराज होकर क्रौंच पर्वत चले गए। माता पार्वती और भगवान शिव अपने पुत्र को मनाने के लिए यहां पहुंचे, लेकिन माता-पिता के आने की सूचना पाकर कार्तिकेय और आगे चले गए। अपने पुत्र की प्रतीक्षा में महादेव और माता पार्वती इसी पावन पर्वत पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। धार्मिक मान्यता है कि आज भी हर अमावस्या को भगवान शिव और पूर्णिमा को माता पार्वती यहां साक्षात पधारती हैं।
इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक और रोमांचक कथा राजकुमारी चंद्रावती की है। महलों का ऐश-ओ-आराम छोड़ जब वे कदली वन में तपस्या कर रही थीं, तब उन्होंने देखा कि एक कपिला (काली) गाय रोज़ एक बेल के पेड़ के नीचे जाकर खड़ी होती है और उसके थनों से स्वतः ही दूध की धारा बहने लगती है। जब उस स्थान की खुदाई की गई, तो वहां से सूर्य के समान देदीप्यमान, स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ। राजकुमारी ने ही यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसके प्रमाण आज भी मंदिर के पत्थरों पर उकेरे गए हैं।
श्रीशैलम का इतिहास बेहद समृद्ध और प्राचीन है।
शिलालेखों के प्रमाण: प्रथम शताब्दी ईस्वी के सातवाहन राजा वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी के नासिक शिलालेख में इस पहाड़ी का ऐतिहासिक उल्लेख मिलता है।
छत्रपति शिवाजी महाराज का संबंध: इतिहास गवाह है कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था और मंदिर के पास एक दक्षिण गोपुरम (प्रवेश द्वार) का निर्माण करवाया था, जिसे आज भी शिवाजी गोपुरम कहा जाता है।
यदि आप इस पावन धाम की यात्रा का मन बना रहे हैं, तो नीचे दी गई तालिका आपकी यात्रा को सुगम बनाएगी:
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| स्थान / जिला | श्रीशैलम, कर्नूल जिला, आंध्र प्रदेश |
| निकटतम बड़ा शहर | हैदराबाद (लगभग 212 किमी) और कर्नूल (लगभग 179 किमी) |
| सर्वोत्तम समय | पूरे वर्ष (अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे सुहावना होता है) |
| मंदिर का समय | सुबह 5:00 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक शाम 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक |
| स्थानीय भाषाएँ | तेलुगु, हिंदी और अंग्रेजी |
| फोटोग्राफी | सख्त वर्जित (Not Allowed) |
विशेष नोट: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन से भक्तों को सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर परिसर में कदम रखते ही मिलने वाली शांति और आध्यात्मिक वातावरण शब्दों से परे है।