After Lunar Eclipse Astro Tips: भारतीय धर्म परंपरा में ग्रहण को केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण समय माना गया है। विशेषकर चंद्र ग्रहण के बाद शुद्धिकरण का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण और मन दोनों पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है।
After Lunar Eclipse Astro Tips: इस साल 3 मार्च को वर्ष का पहला Lunar Eclipse लगने जा रहा है। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में चंद्र ग्रहण को विशेष आध्यात्मिक प्रभाव वाला समय माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण में सूक्ष्म ऊर्जा परिवर्तन होते हैं, जिसका असर मन, शरीर और कुंडली के ग्रहों पर पड़ सकता है।हिंदू परंपरा में ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और शुद्धिकरण का विशेष महत्व बताया गया है। कुछ ग्रंथों, जैसे Garuda Purana, में भी शारीरिक और मानसिक शुद्धि के उपायों का उल्लेख मिलता है। ऐसे में ग्रहण के बाद एक विशेष विधि से स्नान करना शुभ फलदायी माना जाता है, जिससे नकारात्मकता दूर हो और कुंडली के नवग्रहों की स्थिति संतुलित हो सके।
ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहला कार्य स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के दौरान सूतक काल माना जाता है, और स्नान के बिना यह प्रभाव समाप्त नहीं होता। इसलिए जैसे ही ग्रहण समाप्त हो, यथाशीघ्र स्नान करके स्वयं को पवित्र करना चाहिए।
भारतीय संस्कृति में स्नान केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी माध्यम है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ग्रहण, संक्रांति, यज्ञ या संतान जन्म जैसे विशेष अवसरों पर स्नान करके शुद्ध होना आवश्यक है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है, जो मन और शरीर को प्रभावित कर सकती है। स्नान इन प्रभावों को शांत करता है और सकारात्मकता का संचार करता है।
चंद्र ग्रहण के बाद स्नान करते समय पानी में थोड़ा सा गंगाजल अवश्य मिलाएं। गंगाजल को अत्यंत पवित्र और दिव्य माना गया है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक भी है। यदि गंगाजल उपलब्ध न हो तो जल में तुलसी के कुछ पत्ते डालकर भी स्नान किया जा सकता है।
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने इष्ट देव का ध्यान करें। नवग्रहों की शांति के लिए “ॐ नवग्रहाय नमः” मंत्र का जप करें या चंद्र देव को कच्चा दूध अर्पित करें। ऐसा करने से ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में संतुलन बना रहता है।
ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि किसी की कुंडली में शनि का प्रभाव अधिक हो, तो ग्रहण के बाद स्नान कर काले तिल का दान करना शुभ माना गया है। इससे शनि संबंधित बाधाएं कम होती हैं और मानसिक तनाव में भी राहत मिलती है।