
Purushottam Maas 2029: अधिक मास (Adhik Maas 2029) 15 जून 2026 को समाप्त हो गया है। इसके साथ ही विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और नए व्यापार जैसे मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी खत्म हो गई है। पंचांग गणना के अनुसार अगला अधिक मास अब वर्ष 2029 में आएगा, जो 16 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेगा।
इस साल अधिक मास (Adhik Maas 2026) ज्येष्ठ के महीने में आया था, जिसके कारण इस बार दो ज्येष्ठ महीने अधिक ज्येष्ठ और शुद्ध ज्येष्ठ रहे। इस पवित्र महीने का समापन सोमवार, 15 जून को हुआ। ज्योतिष शास्त्र में सोमवार के दिन अमावस्या का पड़ना बेहद दुर्लभ और पुण्यदायी माना जाता है।
श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर, दान-पुण्य कर पुरुषोत्तम मास को विदाई दी। अब 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हो गया है, जो 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, विवाह के लिए सबसे उत्तम और शुभ लग्न मुहूर्त 18 जून के बाद से लगातार उपलब्ध हैं।
यदि आप सोच रहे हैं कि इस आध्यात्मिक उत्सव का साक्षी बनने का मौका दोबारा कब मिलेगा, तो आपको थोड़ा लंबा इंतजार करना होगा। ज्योतिषीय गणना और हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अगला अधिक मास अब से ठीक 3 साल बाद यानी वर्ष 2029 में आएगा।
महीना: वर्ष 2029 में यह चैत्र के महीने में लगेगा।
तिथियां: अगला मलमास 16 मार्च 2029 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2029 तक चलेगा।
| वर्ष | किस हिंदी महीने में लगेगा अधिक मास |
| 2029 | चैत्र अधिक मास |
| 2031 | भाद्रपद (भादो) अधिक मास |
| 2034 | आषाढ़ अधिक मास |
| 2037 | ज्येष्ठ अधिक मास (11 साल बाद दोबारा ज्येष्ठ में) |
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य संक्रांति न होने के कारण इस अतिरिक्त महीने को मलमास या अशुद्ध मानकर कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था। इस वजह से संसार में इस महीने की काफी उपेक्षा होने लगी और इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते थे। अपनी दुर्दशा से दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास पहुंचा।
कृपानिधान भगवान विष्णु ने उसकी व्यथा सुनकर न केवल उसे अपनाया, बल्कि अपना सबसे उत्तम नाम पुरुषोत्तम भी इस महीने को सौंप दिया। श्रीहरि ने वरदान दिया कि: जो भी इस महीने में मेरी आराधना, जप, तप और दान करेगा, उसे पूरे वर्ष की पूजा से भी अधिक फल प्राप्त होगा। तभी से यह महीना आध्यात्मिक रूप से साल के बाकी सभी महीनों से श्रेष्ठ और फलदायी माना जाने लगा।
पंचांग विज्ञान के जानकारों का कहना है कि अधिक मास का आना कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि खगोलीय और गणितीय गणना का अद्भुत नमूना है। सौर वर्ष (Solar Year) में कुल 365 दिन और लगभग 6 घंटे होते हैं, जबकि चंद्र वर्ष (Lunar Year) में 354 दिन होते हैं। दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है।
तीन सालों में यह अंतर बढ़कर करीब 33 दिन (एक महीने से थोड़ा ज्यादा) हो जाता है। इसी समयावधि और मौसम के चक्र को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे हम अधिक मास कहते हैं। अधिक मास तब पड़ता है जब किसी चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती।