
Nirjala Ekadashi 2026 Date and Parana Time:निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की यह एकादशी भगवान विष्णु (Lord Vishnu Worship) को समर्पित मानी जाती है और इसका विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। महाभारत काल में भीमसेन और महर्षि वेदव्यास से जुड़ी कथा के कारण इसे भीम एकादशी भी कहा जाता है। महाराज देवकीनन्दन ठाकुर ने अपने यूट्यूब पॉडकास्ट में निर्जला एकादशी की तिथि, पारण समय, व्रत नियम और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया है।
धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित मान्यताओं में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत की महिमा इतनी अपार है कि जो व्यक्ति दिनभर उपवास रखकर रात्रि में हरि कीर्तन और जागरण करता है, उसकी पिछली 100 पीढ़ियां और आने वाली 100 पीढ़ियां (कुल 200 पीढ़ियां) सीधे विष्णु लोक को प्राप्त कर सकती हैं।
व्रत की तिथि: 25 जून 2026 (दिनभर बिना अन्न-जल के संकल्प)
पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 26 जून 2026 को सुबह 05:30 बजे से 07:44 बजे के बीच।
एक बार भगवान श्री कृष्ण और वेदव्यास जी महाराज पांडवों के मध्य में विराजमान थे। तब वेदव्यास जी महाराज ने सभी एकादशियों का चारों वेदों का और अर्थ धर्म का मोक्ष की चर्चा कर रहे थे और उन्हें ज्ञान प्रदान कर रहे थे। इस ज्ञान चर्चा के दौरान सभी पांडव बड़े ध्यान से मोक्ष का मार्ग सुन रहे थे, लेकिन तभी एक ऐसी परिस्थिति आई जिसने इतिहास में एक अनूठी कथा को जन्म दे दिया।
जब वेदव्यास जी ने एकादशी के महत्व को समझाते हुए कहा कि चाहे कृष्ण पक्ष की हो चाहे शुक्ल पक्ष की हो किसी भी एकादशी के दिन व्यक्ति को अन्न नहीं ग्रहण करना चाहिए, यह सुनते ही भीमसेन के रोंगटे खड़े हो गए और भीमसेन ने कहा "प्रभु हमारी प्रार्थना स्वीकार करो। हम आपके चरणों में निवेदन करते हैं। मां कुंती भी व्रत रह लेती है। धर्मराज, नकुल, सहदेव, ये अर्जुन ये सब व्रत रह लेते हैं। द्रौपदी व्रत रहती है। ये सब रह लेते हैं। पर हम पर बिना अन्न के नहीं रहा जाता। हम बहुत परेशान हैं। हम बड़े परेशान हैं। और यह लोग जो है हमें तो आप कृपा करके बताइए हम क्या करें?"
भीमसेन का शरीर विशाल था और उनकी भूख भी वैसी ही थी। अपनी बेबसी को आगे रखते हुए तब भीमसेन ने कहा कि "हे आदरणीय मुनि मैं सच कहता हूं। मैं एक बार भी भोजन किए बिना उपवास नहीं कर सकता। मेरे पेट की जो प्रचंड अग्नि है जिसे वृक कहा जाता है। केवल तभी शांत हो सकती है। जब मैं भरपूर भोजन करूं।
इसलिए महामुनि मैं पूरे वर्ष केवल एक ही व्रत कर सकता हूं। कृपया मुझे ऐसी कोई बात बता दो जब आप कह रहे हो तो एक व्रत मैं कर लूंगा लेकिन एक ही दिन रह सकता हूं और हर महीना मुझे दो-दो बार आप भूखा रखोगे तो मैं नहीं रह सकता।
व्यास जी ने उन्हें कोई शॉर्टकट नहीं दिया, बल्कि एक कठिन लेकिन एक ही दिन में पूरे साल का फल देने वाला मार्ग दिखाया। तो उन्होंने कहा कि जल ग्रहण किए बिना ही व्रत करना चाहिए। केवल कुल्ला करने के लिए जो आचमन हम लोग धार्मिक अनुष्ठानों में करते हैं वही हथेली से थोड़ा जल पीने का क्रिया के लिए ही जल उपयोग किया जा सकता है। परंतु इसके अलावा विद्वान व्यक्ति को किसी भी प्रकार का जल ग्रहण नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से व्रत खंडित हो जाता है। एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक जल ग्रहण न करने से व्रत पूर्ण होता है।"
व्यास जी ने भीम को सांत्वना देते हुए इस व्रत की महिमा बताई कि निर्जला एकादशी से वर्ष भर पड़ने वाली सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। शंख चक्र, गधा और से सुशोभित भगवान केशव ने मुझे बताया है कि जो व्यक्ति कुछ त्याग कर केवल सब कुछ त्याग कर केवल उनकी शरण में आकर एकादशी व्रत करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।"
इस प्रकार, महाबली भीम की भोजन की लाचारी के कारण संसार को निर्जला एकादशी (भीमसेनी एकादशी) जैसा महान व्रत मिला, जो अकेले ही सभी एकादशियों का पुण्य देने में समर्थ है।
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