धर्म और अध्यात्म

Parama Ekadashi Katha: कुबेर और राजा हरिश्चंद्र से भी जुड़ी है परमा एकादशी व्रत की मान्यता, जानें व्रत का महत्व

Parama Ekadashi Vrat Katha : तीन साल बाद आने वाली परमा एकादशी का धार्मिक महत्व जानें। पढ़ें सुमेधा-पवित्रा कथा, पूजा विधि, व्रत नियम और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ी मान्यताएं।

2 min read
Jun 09, 2026
Benefits of Ekadashi Fast
Parama Ekadashi Katha: परमा एकादशी व्रत का महत्व, सुमेधा-पवित्रा की कथा में मिलता है उल्लेख (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Importance of Parama Ekadashi Fast: अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी (Parama Ekadashi) इस बार तीन साल बाद पड़ रही है, इसलिए इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, इस दिन पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व बताया गया है।

सुमेधा-पवित्रा की कथा (Parama Ekadashi Vrat Katha)

काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम के ब्राह्मण और उनकी पत्नी पवित्रा रहते थे। दोनों बहुत गरीब थे, लेकिन धर्म और अतिथि सेवा में कमी नहीं रखते थे। गरीबी से परेशान होकर सुमेधा ने परदेश जाने का मन बनाया, लेकिन पवित्रा ने कहा कि भाग्य और पिछले कर्मों का फल घर पर रहकर धर्म से ही बदलेगा। कुछ समय बाद कौण्डिन्य ऋषि उनके घर आए। दोनों ने अपनी क्षमता के अनुसार ऋषि की सेवा की। पवित्रा ने उनसे दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। ऋषि ने कहा कि अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत करो।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, दान और जागरण करने से दुख, पाप और दरिद्रता दूर होती है। सुमेधा और पवित्रा ने श्रद्धा से यह व्रत किया। इसके बाद उनके जीवन में बदलाव आया। कथा के अनुसार, एक राजकुमार ने उन्हें सुंदर घर और जीवन चलाने के लिए गांव दिया। दोनों ने जीवन में सुख पाया और अंत में भगवान विष्णु के लोक को प्राप्त हुए।

सबसे पहले कुबेर फिर राजा हरिश्चंद्र ने किया था ये व्रत कथा में मुख्य रूप से सुमेधा और पवित्रा को यह व्रत करते बताया गया है। हालांकि कौण्डिन्य ऋषि इस व्रत का महत्व बताते हुए कुबेर और राजा हरिश्चंद्र का भी उदाहरण देते हैं।

कथा के अनुसार, कुबेर ने इस व्रत के प्रभाव से धनाध्यक्ष पद पाया और हरिश्चंद्र ने भी कठिन समय में इस व्रत से सुख पाया। लेकिन श्रीकृष्ण ने परमा एकादशी की जो कथा युधिष्ठिर को सुनाई उसके अनुसार सुमेधा-पवित्रा ने इस व्रत को किया था।

परमा एकादशी व्रत का महत्व

नीतिका शर्मा ने बताया कि परमा एकादशी व्रत का उल्लेख पद्म पुराण और अन्य वैष्णव ग्रंथों में मिलता है, जहां इसके धार्मिक महत्व का वर्णन किया गया है। परमा एकादशी अधिकमास में आती है और अधिकमास तीन साल में एक बार आता है इसलिए परमा एकादशी व्रत तीन साल में एक बार पड़ता है और ऐसे में मान्यता है कि अधिकमास में पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व विशेष माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत रखने वाले जातक का 100 यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। परमा का अर्थ है सबसे उत्तम, यानि परमा एकादशी सभी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ व उत्तम है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति दिलाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

Updated on:
09 Jun 2026 05:45 pm
Published on:
09 Jun 2026 05:43 pm