धर्म और अध्यात्म

Shadi Ke Shubh Muhurat: 15 जून को समाप्त होगा अधिकमास, 19 जून से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त 2026

Vivah Muhurat 2026 after Adhikmaas: 15 जून 2026 को अधिकमास समाप्त होने के बाद 19 जून से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे। जुलाई तक कुल 18 शुभ विवाह तिथियां उपलब्ध रहेंगी।

2 min read
Jun 14, 2026
Vivah Muhurat 2026
Shadi Ke Shubh Muhurat : 19 जून से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त, 15 जून को खत्म होगा अधिकमास (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

June July Shubh Shadi Dates: 15: 15 जून को अधिकमास (Adhik Maas) समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर शादी-विवाह का शुभ दौर शुरू होने जा रहा है। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार 19 जून 2026 से विवाह (Vivah Muhurat 2026) मुहूर्त प्रारंभ होंगे और 12 जुलाई तक कुल 18 शुभ तिथियों पर विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकेंगे। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू (Chaturmas 2026) हो जाएगा, जिसके चलते चार महीने तक विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ऐसे में विवाह योग्य परिवारों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं।

15 जून को समाप्त होगा अधिकमास 2026

डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास या पुरुषोत्तम (Purushottam Maas 2026) मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है। लेकिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस वर्ष अधिकमास 15 जून को समाप्त हो रहा है। इसके बाद शुभ कार्यों के लिए रास्ते खुल जाएंगे।

19 जून से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त

अधिकमास (Adhik Maas) समाप्त होने के तीन दिन बाद 19 जून से विवाह मुहूर्त प्रारंभ होंगे। 19 जून से 12 जुलाई तक कुल 18 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। जिनमें विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं। यही कारण है कि परिवारों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं।

22 जुलाई भडल्या नवमी पर अबूझ सावा

इस पूरे सीजन में सबसे बड़ी राहत और उत्सुकता 22 जुलाई को आने वाली भडल्या नवमी को लेकर है। इस दिन को सनातन परंपरा में अबूझ सावा माना गया है। अबूझ सावे का अर्थ है कि जिन जातकों के विवाह के लिए कोई व्यक्तिगत या शुद्ध मुहूर्त नहीं निकल पा रहा है, वे भी इस दिन बिना किसी संकोच के फेरे ले सकते हैं।

25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास

विवाह मुहूतों के इस दौर के बाद 25 जुलाई से चातुर्मास (Chaturmas 2026) प्रारंभ हो जाएगा, जो 21 नवंबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते है और पाताललोक में विश्राम करते हैं। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास समाप्त होने के बाद ही पुनः मांगलिक कार्यों के आयोजन शुरू होंगे।

विवाह का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है। इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है। विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारों में से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है।

वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त

15 जुलाई से ग्रहों की बदलती चाल और 18 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति का तारा अस्त होने के कारण सभी शुभ कार्यों पर धार्मिक रूप से स्वतः ही विराम लग जाएगा। ऐसे में 12 जुलाई को इस सीजन का आखिरी पंचांगीय सावा संपन्न होगा।

महीनावर्षतिथियाँ
जून202619, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून
जुलाई20261, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11, 12 जुलाई
नवंबर202621, 24, 25, 26 नवंबर
दिसंबर20262, 3, 4, 5, 6, 11, 12 दिसंबर

नोट: कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट-बढ़ सकती है और परिवर्तन संभव है।