
June July Shubh Shadi Dates: 15: 15 जून को अधिकमास (Adhik Maas) समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर शादी-विवाह का शुभ दौर शुरू होने जा रहा है। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार 19 जून 2026 से विवाह (Vivah Muhurat 2026) मुहूर्त प्रारंभ होंगे और 12 जुलाई तक कुल 18 शुभ तिथियों पर विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकेंगे। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू (Chaturmas 2026) हो जाएगा, जिसके चलते चार महीने तक विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ऐसे में विवाह योग्य परिवारों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं।
डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास या पुरुषोत्तम (Purushottam Maas 2026) मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है। लेकिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस वर्ष अधिकमास 15 जून को समाप्त हो रहा है। इसके बाद शुभ कार्यों के लिए रास्ते खुल जाएंगे।
अधिकमास (Adhik Maas) समाप्त होने के तीन दिन बाद 19 जून से विवाह मुहूर्त प्रारंभ होंगे। 19 जून से 12 जुलाई तक कुल 18 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। जिनमें विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं। यही कारण है कि परिवारों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं।
इस पूरे सीजन में सबसे बड़ी राहत और उत्सुकता 22 जुलाई को आने वाली भडल्या नवमी को लेकर है। इस दिन को सनातन परंपरा में अबूझ सावा माना गया है। अबूझ सावे का अर्थ है कि जिन जातकों के विवाह के लिए कोई व्यक्तिगत या शुद्ध मुहूर्त नहीं निकल पा रहा है, वे भी इस दिन बिना किसी संकोच के फेरे ले सकते हैं।
विवाह मुहूतों के इस दौर के बाद 25 जुलाई से चातुर्मास (Chaturmas 2026) प्रारंभ हो जाएगा, जो 21 नवंबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते है और पाताललोक में विश्राम करते हैं। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास समाप्त होने के बाद ही पुनः मांगलिक कार्यों के आयोजन शुरू होंगे।
सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है। इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है। विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारों में से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है।
15 जुलाई से ग्रहों की बदलती चाल और 18 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति का तारा अस्त होने के कारण सभी शुभ कार्यों पर धार्मिक रूप से स्वतः ही विराम लग जाएगा। ऐसे में 12 जुलाई को इस सीजन का आखिरी पंचांगीय सावा संपन्न होगा।
| महीना | वर्ष | तिथियाँ |
|---|---|---|
| जून | 2026 | 19, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून |
| जुलाई | 2026 | 1, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11, 12 जुलाई |
| नवंबर | 2026 | 21, 24, 25, 26 नवंबर |
| दिसंबर | 2026 | 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 दिसंबर |
नोट: कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट-बढ़ सकती है और परिवर्तन संभव है।