धर्म और अध्यात्म

Somvati Amavasya 2026: मिथुन संक्रांति के साथ सूर्य-चंद्रमा का विशेष योग, ज्योतिष से जानिए किसको मिल सकता है लाभ

Mithun Sankranti : Somvati Amavasya 2026 इस बार मिथुन संक्रांति के साथ पड़ रही है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य-चंद्रमा का यह दुर्लभ योग कुछ राशियों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
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Updated: 12 Jun 2026, 11:46 AM IST
Somvati Amavasya remedies
Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या उपाय और धार्मिक महत्व (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Somvati Amavasya Remedies:सोमवती अमावस्या इस बार मिथुन संक्रांति (Mithun Sankranti) के साथ पड़ रही है, जिसे ज्योतिष में बेहद दुर्लभ संयोग माना जाता है। 15 जून 2026 को बनने वाला सूर्य-चंद्रमा का यह विशेष योग धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिर्विद राजेंद्र मुंजाल के अनुसार, इस महासंयोग का असर कुछ राशियों पर सकारात्मक पड़ सकता है, खासकर करियर, व्यापार और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में।

लोगों का मानना ​​है कि इस दिन धार्मिक रस्में जैसे दान, प्रार्थना, या पुरखों को तर्पण करने का आम दिनों से कहीं ज्यादा महत्व होता है। इसीलिए मंदिरों में भीड़ ज्यादा होती है।

सोमवती अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

यह तब होती है जब अमावस्या, सोमवार को पड़ती है। ऐसा साल में सिर्फ एक या दो बार ही होता है। 2026 में, यह 15 जून को और फिर 9 नवंबर को पड़ेगा।

समय खास है: जून में, यह 14 जून को दोपहर 12:19 बजे से 15 जून को सुबह 8:23 बजे तक चलेगा। नवंबर में, यह 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगा और 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे खत्म होगा।

किन राशियों को मिल सकता है लाभ

शास्त्रों में सूर्य संक्रांति और सोमवती अमावस्या दोनों को ही पितरों की तृप्ति के लिए अचूक माना गया है। इस बार सूर्य और चंद्रमा (जो सोमवार के स्वामी हैं) का यह मिलन आध्यात्मिक रूप से ऊर्जा को कई गुना बढ़ा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस महासंयोग के प्रभाव से मेष, सिंह, कन्या और कुंभ राशि के जातकों को व्यापार में भारी मुनाफा, नौकरी में पदोन्नति और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में राहत मिलने की संभावना मानी जाती है।

सोमवती अमावस्या पर क्या करें

ज्योतिषी आपकी किस्मत चमकाने और पॉजिटिव एनर्जी को खींचने के लिए कुछ चीजें बताते हैं। अपने दिन की शुरुआत नहाने से करें, फिर सूरज को अर्घ्य दें। आप पीपल या तुलसी जैसे पवित्र पौधों की पूजा भी कर सकते हैं, ज़रूरतमंदों को खाना, कपड़े या पानी दान कर सकते हैं, अपने पुरखों के लिए तर्पण कर सकते हैं (जैसे तर्पण या दीया जलाना), और “ओम नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र जैसे मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

ज्योतिष कहता है कि यह तारीख आध्यात्मिक विकास और खुद को शुद्ध करने के लिए खास तौर पर जरूरी है। लेकिन आखिर में, बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या मानते हैं और आपके परिवार की परंपराएं क्या हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

Updated on:
12 Jun 2026, 11:46 AM IST
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