Sri Sri Ravi Shankar : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में Art of Living ने अपना 45वां स्थापना दिवस मनाया। श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में संस्था ने ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े 9 नए प्रोजेक्ट लॉन्च किए। जानें कैसे Art of Living 182 देशों में वैश्विक आंदोलन बना।
Sri Sri Ravi Shankar, Art of Living Foundation, PM Modi : बेंगलुरु का माहौल रविवार को आध्यात्म और उत्साह से भर गया, जब Art of Living ने अपना 45वां स्थापना दिवस बड़े स्तर पर मनाया। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम में शामिल हुए और संस्था के नए मेडिटेशन सेंटर ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में हजारों लोगों की मौजूदगी ने इसे सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के बड़े उत्सव में बदल दिया।
श्री श्री रविशंकर द्वारा 1981 में शुरू किया गया Art of Living आज सिर्फ योग और ध्यान सिखाने वाली संस्था नहीं रह गया है। पिछले 45 वर्षों में यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से काम करने वाला वैश्विक आंदोलन बन चुका है। आज संस्था 182 देशों में सक्रिय है और दुनिया भर में इसके 10 हजार से ज्यादा सेंटर काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति और सकारात्मक सोच सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। उन्होंने कहा कि Art of Living जैसी संस्थाएं लोगों को तनावमुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दे रही हैं। पीएम मोदी ने ‘ध्यान मंदिर’ को आधुनिक समय में आध्यात्मिक चेतना का बड़ा केंद्र बताया।
बताया जा रहा है कि यह ध्यान केंद्र आधुनिक तकनीक और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का अनोखा मेल है, जहां हजारों लोग एक साथ ध्यान कर सकेंगे।
इस कार्यक्रम में संस्था ने समाज सेवा से जुड़े 9 बड़े प्रोजेक्ट भी लॉन्च किए, जिनका सीधा असर गांवों, महिलाओं, युवाओं और जरूरतमंद लोगों पर पड़ेगा।
11 राज्यों के ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट विलेज सेंटर खोले जाएंगे। यहां रोजगार, नेतृत्व क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर काम होगा।
संस्था अब तक 90 लाख से ज्यादा पेड़ लगा चुकी है। अगले चरण में 45 लाख मोरिंगा पेड़ और हजारों पंचवटी उपवन तैयार किए जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण को लेकर यह अभियान काफी बड़ा माना जा रहा है।
50 हजार युवाओं और महिलाओं को तकनीकी और नेतृत्व प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
450 आदिवासी गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार सहायता पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
ग्रामीण परिवारों को सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से जोड़ने के लिए डिजिटल वॉलंटियर्स तैयार किए जाएंगे।
गांवों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ने के लिए देशभर में टेली-हेल्थ नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
60 हजार कैदियों और जेल कर्मचारियों के लिए तनाव प्रबंधन और स्किल ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
संस्था 22 राज्यों में पहले से ही मुफ्त मूल्य आधारित शिक्षा दे रही है। अब इसे बढ़ाकर 2000 स्कूलों तक ले जाने की तैयारी है।
6 लाख से ज्यादा महिलाओं को लाभ पहुंचाने के बाद अब इस योजना का लक्ष्य 10 लाख महिलाओं तक पहुंचना है।
Art of Living की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जाती है कि यह संस्था सिर्फ प्रवचन या योग तक सीमित नहीं रही। प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य से लेकर किसानों की मदद, नशा मुक्ति अभियान और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य तक, संस्था लगातार कई सामाजिक क्षेत्रों में काम कर रही है।
कोविड महामारी के दौरान भी संस्था ने लाखों लोगों तक राशन, दवाइयां और मानसिक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाई थी। इसके अलावा ‘सुदर्शन क्रिया’ जैसी ब्रीदिंग तकनीक को दुनिया भर में काफी लोकप्रियता मिली है।
श्री श्री रविशंकर हमेशा कहते हैं कि “तनावमुक्त और हिंसा मुक्त समाज ही विश्व शांति का रास्ता बना सकता है।” शायद यही वजह है कि Art of Living आज युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग में अपनी पहचान बना चुका है।
45 साल पहले शुरू हुई यह यात्रा अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और बेहतर जीवन का माध्यम बन चुकी है।