Surya enters Rohini Nakshatra : आसमान से बरसते अंगारे और पसीने से तरबतर कर देने वाली गर्मी के लिए तैयार हो जाइए। सूर्य देव कल से अपना रौद्र रूप दिखाने आ रहे हैं, जिससे नौ दिनों तक धरती भट्टी की तरह तपेगी। जानिए इस बार का नौतपा आपके लिए राहत लाएगा या आफत।
Nautapa 2026: मेदिनी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जलवायु में परिवर्तन (Weather Change) का कारक सूर्य जब नक्षत्र विशेष में प्रवेश करते हैं तो मौसम को प्रभावित करते हैं। सूर्य का 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होते ही नौतपा शुरू हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार सूर्य का रोहिणी में परिभ्रमण का समय 13 से अधिक दिनों का भी संभावित रहता है। किंतु प्रथम 9 दिन नौतपा (Nautapa 2026) के रूप में जाने जाते हैं।
इन्हीं 9 दिनों में अगले 4 महीनों में वर्षा ऋतु की स्थिति क्या रहेगी, इसका गणित बन जाता है। इन नौ दिनों में तीन अलग-अलग प्रकार की स्थितियां बनेंगी। इसके अंतर्गत आंधी-तूफान एवं बूंदाबांदी और कहीं तेज तो कहीं कम बारिश होगी। इसमें दक्षिण-पश्चिम दिशा का विशेष प्रभाव दिखाई देगा।
वैज्ञानिक और ज्योतिषीय नजरिए से देखें तो जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है। वैसे तो सूर्य इस नक्षत्र में लगभग 13 से 14 दिनों तक रहते हैं, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिनों को सबसे ज्यादा गर्म माना जाता है, इसीलिए इसे नौतपा कहा जाता है।
खास बात: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नौतपा के इन 9 दिनों में धरती जितनी ज्यादा तपती है, उतनी ही अच्छी बारिश आने वाले चार महीनों (वर्षा ऋतु) में होती है। इसे प्रकृति का वाटर हीटिंग सिस्टम भी कह सकते हैं, जो मॉनसून को एक्टिव करता है।
इस बार का नौतपा सिर्फ सूखी गर्मी लेकर नहीं आ रहा है। गणना के अनुसार, इन 9 दिनों के दौरान देश के मौसम में तीन अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे:
धूलभरी आंधी और तूफान: दोपहर बाद अचानक मौसम करवट ले सकता है और तेज हवाएं चल सकती हैं।
बूंदाबांदी और प्री-मॉनसून बारिश: कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की भी संभावना है, जिससे उमस (humidity) बढ़ेगी। इसमें विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाओं का असर ज्यादा दिखेगा।
इस बार रोहिणी का निवास समुद्र में है। समुद्र चूंकि जल आपूर्ति का विशेष आकाशीय केंद्र माना गया है, अर्थात वाष्प बनकर के बादल बनने की प्राकृतिक ताकत रहती है। इस दृष्टि से रोहिणी का प्रभाव समुद्र में होने से उत्तम वृष्टि के संकेत दे रहा है। इस बार समय का निवास माली के यहां है। ऐसा कहा जाता है कि माली का घर वर्षा ऋतु के शुभागमन के लिए उत्तम माना गया है। इस दृष्टि से भी वृष्टि अच्छी होगी।
चूंकि ग्लोबल वार्मिंग और अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण पिछले कुछ सालों से गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं, इसलिए नौतपा के दौरान खुद को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
क्या कहता है विज्ञान? मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मई के आखिरी हफ्ते में सूर्य की किरणें भारत के भूभाग पर सीधे लंबवत (vertical) पड़ती हैं। इस दौरान वायुदाब (air pressure) कम हो जाता है, जिससे हिंद महासागर से मॉनसून की हवाएं खींचकर भारत की तरफ आती हैं। यानी नौतपा का तपना वैज्ञानिक रूप से भी मॉनसून के लिए जरूरी है।
सेहत का रखें ख्याल: इस दौरान 'हीट स्ट्रोक' या लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच बिना वजह बाहर निकलने से बचें।