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Nautapa 2026: क्यों रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश बढ़ा देता है धरती की तपिश?

Rohini Nakshatra 2026 : 25 मई से शुरू हो रहा नौतपा इस बार भीषण गर्मी के साथ ज्योतिषीय बदलाव भी लेकर आ रहा है। मान्यता है कि सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही धरती की तपिश बढ़ जाती है। इन 9 दिनों को पूजा, दान और सूर्य साधना के लिए बेहद खास माना जाता है।

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भारत

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Manoj Vashisth

May 20, 2026

Nautapa 2026 Astro-Alert

Nautapa 2026: नौतपा 2026: 9 दिन जब सूरज दिखाएगा सबसे प्रचंड रूप (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Nautapa 2026 Date: भारत में मई-जून की तपती दोपहरों के बीच हर साल एक ऐसा समय आता है, जब लोग कहते हैं अब असली गर्मी शुरू हुई। इसी दौर को नौतपा कहा जाता है। साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में इन 9 दिनों को बेहद खास माना गया है, क्योंकि इसी समय सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और धरती पर गर्मी अपने चरम पर पहुंचने लगती है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही सूर्य का प्रभाव इतना तीखा क्यों हो जाता है? इसके पीछे ज्योतिष, प्रकृति और मौसम तीनों का गहरा संबंध बताया जाता है।

क्यों खास है रोहिणी नक्षत्र? (Rohini Nakshatra 2026)

वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं और रोहिणी चौथा नक्षत्र माना जाता है। इसका स्वामी चंद्रमा है, जिसे शीतलता, भावनाओं और जल तत्व का कारक माना जाता है। दूसरी ओर सूर्य अग्नि और तेज का प्रतीक है।

मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब वह प्रकृति के जल तत्व को तेजी से प्रभावित करता है। नतीजा यह होता है कि धरती की नमी कम होने लगती है और गर्म हवाएं वातावरण को और ज्यादा तपाने लगती हैं। इसी कारण इन 9 दिनों को “नौतपा” कहा गया, यानी नौ दिनों की तीखी तपन।

नौतपा 2026 में मौसम विज्ञान क्या कहता है? (Nautapa Weather Effect)

धार्मिक मान्यताओं के अलावा मौसम विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मई के अंतिम और जून के शुरुआती दिन उत्तर भारत में सबसे ज्यादा गर्म माने जाते हैं। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में लू का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।

पुरानी कहावत भी है कि अगर नौतपा अच्छे से तप जाए तो मानसून बेहतर रहने की संभावना बढ़ती है। ग्रामीण इलाकों में आज भी किसान नौतपा को मौसम के संकेत के रूप में देखते हैं।

नौतपा के चार चरण और उनका असर

रोहिणी नक्षत्र के चार चरण होते हैं और हर चरण का संबंध अलग ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इन चरणों का प्रभाव लोगों के जीवन पर भी पड़ सकता है।

पहला चरण – मंगल का प्रभाव

इस दौरान आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ सकती है। नौकरी में आगे बढ़ने या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बनते हैं। राजनीति और प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए भी समय महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरा चरण – शुक्र का प्रभाव

यह समय प्रेम, कला और सुख-सुविधाओं से जुड़ा माना जाता है। फैशन, डिजाइन, संगीत और क्रिएटिव फील्ड में काम करने वालों को फायदा मिल सकता है। रिश्तों में भी मिठास बढ़ने के संकेत माने जाते हैं।

तीसरा चरण – बुध का प्रभाव

विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह चरण खास माना जाता है। पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ सकती है और बिजनेस में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में समझदारी से लिए गए फैसले लाभ दे सकते हैं।

चौथा चरण – चंद्रमा का प्रभाव

इस चरण में परिवार और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों में सुधार देखने को मिल सकता है। कलाकारों और लेखन से जुड़े लोगों को नई पहचान मिलने के योग भी बताए जाते हैं।

नौतपा में क्या करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा के दौरान सूर्य देव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। सुबह तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना, गरीबों को पानी और शीतल वस्तुओं का दान देना पुण्यकारी माना गया है।

कई लोग इस दौरान छाया दान, जल सेवा और पक्षियों के लिए पानी रखने जैसे कार्य भी करते हैं। मान्यता है कि इससे सूर्य दोष कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

सेहत का भी रखें ध्यान

नौतपा के दौरान तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं—

  • दोपहर में तेज धूप से बचें
  • ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लें
  • खाली पेट बाहर न निकलें
  • बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
  • हल्के और सूती कपड़े पहनें

नौतपा सिर्फ गर्मी का नाम नहीं है। भारतीय परंपरा में यह प्रकृति, मौसम और ज्योतिष के मेल का ऐसा समय माना जाता है, जो इंसान को तपकर मजबूत बनने का संदेश भी देता है। इन 9 दिनों में जहां एक तरफ सूरज अपनी पूरी ताकत दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ लोग पूजा, दान और आत्मचिंतन के जरिए सकारात्मक ऊर्जा पाने की कोशिश करते हैं।