धर्म और अध्यात्म

Vivah Muhurat 2026 : 35 दिन बाद शुरू होंगे विवाह मुहूर्त, अधिकमास और चातुर्मास से नवंबर तक सीमित रहेंगे शुभ दिन

Vivah Muhurat 2026 : अधिकमास की शुरुआत के साथ 35 दिनों तक विवाह मुहूर्त बंद रहेंगे। गुरु तारा अस्त और चातुर्मास के कारण नवंबर तक सीमित शुभ तिथियां मिलेंगी, जबकि पूजा-पाठ, कथा और धार्मिक आयोजनों का महत्व बढ़ेगा।

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May 17, 2026
Vivah Muhurat 2026 : 35 दिन बाद खुलेंगे विवाह मुहूर्त, नवंबर तक बेहद सीमित रहेंगे शुभ दिन (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Vivah Muhurat 2026 : जयपुर में रविवार से अधिकमास की शुरुआत के साथ विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। अगले 35 दिनों तक शहनाइयों की जगह जप, तप, भजन-पूजन और धार्मिक आयोजनों की गूंज सुनाई देगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अधिकमास, गुरु तारा अस्त और चातुर्मास के कारण इस वर्ष नवंबर तक विवाह मुहूर्त बेहद सीमित रहेंगे। इस दौरान शहर में श्रीमद्भागवत कथा, नानी बाई का मायरा, दान-पुण्य और पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित होंगे।

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35 दिन बाद शुरू होंगे विवाह मुहूर्त

जप, तप, पुण्य और पूजन के लिए खास अधिकमास की रविवार से शुरुआत होने के साथ ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। अगला विवाह मुहूर्त 35 दिन बाद 19 जून से शुरू होगा। इस वर्ष अधिकमास, गुरु तारा अस्त और चातुर्मास के कारण दिसंबर तक विवाह मुहूर्त बेहद सीमित रहेंगे। इस वर्ष अधिकमास का अतिरिक्त माह जुड़ने से 15 मई से 20 नवंबर तक धार्मिक आयोजन ही प्रमुख रहेंगे।

वृंदावन, बनारस, हरिद्वार सहित अन्य जगहों के कथावाचकों की मौजूदगी में शहर में 100 से अधिक श्रीमद्भागवत कथाएं, नानी बाई का मायरा सहित अन्य कथाएं होंगी। इस बीच ऑनलाइन क्यूआर कोड भी कथा के लिए तैयार करवाया है। बड़ी संख्या में जीवदया के लिए समाजों की ओर से एक परिवार एक परिंडा अभियान भी चलाया जाएगा।

8 जुलाई से 11 अगस्त तक गुरु तारा रहेगा अस्त

ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा के अनुसार विवाह मुहूर्त का निर्णय सूर्य संक्रांतियों और गुरु-शुक्र तारे के उदय-अस्त के आधार पर किया जाता है। कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु और मीन सूर्य संक्रांतियों में विवाह नहीं किए जाते। 18 जुलाई से 11 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेगा। इसके साथ ही 25 जुलाई से 19 नवंबर तक चातुर्मास रहेगा, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह देवशयन काल माना जाता है और विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ फिर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी।

विवाह मुहूर्त 2026

महीनातिथिदिनविवाह शुभ मुहूर्त
जून 202621-जून-2026रविवारसुबह 09:31 – सुबह 11:20
जून 202622-जून-2026सोमवारसुबह 10:31 – सुबह 05:54 (23-जून)
जून 202623-जून-2026मंगलवारसुबह 05:55 – सुबह 10:12
जून 202624-जून-2026बुधवारदोपहर 01:59 – सुबह 05:54 (25-जून)
जून 202625-जून-2026गुरुवारसुबह 05:56 – सुबह 07:08
जून 202626-जून-2026शुक्रवारशाम 07:16 – सुबह 05:54 (27-जून)
जून 202627-जून-2026शनिवारसुबह 05:56 – रात 10:10
जून 202629-जून-2026सोमवारशाम 04:16 – रात 04:03 (30-जून)
जुलाई 202601-जुलाई-2026बुधवारसुबह 06:51 – दोपहर 04:03
जुलाई 202606-जुलाई-2026सोमवाररात 01:43 – सुबह 06:00 (07-जुलाई)
जुलाई 202607-जुलाई-2026मंगलवारसुबह 06:01 – दोपहर 02:31
जुलाई 202611-जुलाई-2026शनिवारमध्यरात्रि 12:06 – सुबह 06:02 (12-जुलाई)
जुलाई 202612-जुलाई-2026रविवारसुबह 06:05 – रात 10:29
महीनातिथिदिनविवाह शुभ मुहूर्त
नवंबर 202621-नवंबर-2026शनिवारसुबह 06:57 – मध्यरात्रि 12:06 (22-नवंबर)
नवंबर 202624-नवंबर-2026मंगलवाररात 11:27 – सुबह 07:00 (25-नवंबर)
नवंबर 202625-नवंबर-2026बुधवारसुबह 07:00 – सुबह 07:00 (26-नवंबर)
नवंबर 202626-नवंबर-2026गुरुवारसुबह 07:00 – शाम 05:46
दिसंबर 202602-दिसंबर-2026बुधवारसुबह 10:32 – सुबह 07:06 (03-दिसंबर)
दिसंबर 202603-दिसंबर-2026गुरुवारसुबह 07:05 – सुबह 10:52
दिसंबर 202603-दिसंबर-2026गुरुवाररात 11:03 – सुबह 07:04 (04-दिसंबर)
दिसंबर 202604-दिसंबर-2026शुक्रवारसुबह 07:07 – सुबह 10:22
दिसंबर 202605-दिसंबर-2026शनिवारसुबह 11:48 – सुबह 07:04 (06-दिसंबर)
दिसंबर 202606-दिसंबर-2026रविवारसुबह 07:08 – सुबह 07:41
जून 202627-जून-2026शनिवारसुबह 05:56 – रात 10:10
दिसंबर 202611-दिसंबर-2026शुक्रवारसुबह 03:05 – सुबह 07:11 (12-दिसंबर)
दिसंबर 202612-दिसंबर-2026शनिवारसुबह 07:11 – रात 03:25 (13-दिसंबर)

चातुर्मास में नहीं होंगे शुभ कार्य

25 जुलाई से 19 नवंबर तक रहेगा चातुर्मास। इस लंबे समय तक विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं होंगे। 17 मई से 20 नवंबर और फिर 12 दिसंबर तक कुल मिलाकर करीब 29 दिन ही विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जबकि करीब 190 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान, दान, जप, तप, पूजा-पाठ और व्रत का विशेष महत्व रहेगा।

अधिकमास में क्यों बढ़ जाता है पूजा-पाठ का महत्व

ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रमोहन दाधीच ने बताया कि अधिकमास के इस अतिरिक्त माह का कोई स्वामी देवता नहीं था, इसलिए इसे पहले मलमास कहा जाता था। बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम मास देकर पवित्र बनाया। इस माह में दान, विष्णु सहस्रनाम पाठ, भगवद्गीता अध्ययन, उपवास और पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। विवाह के जून में आठ, जुलाई में नौ, नवंबर में छह और दिसंबर में छह मुहूर्त रहेंगे। चातुर्मास में देवशयन रहेगा।

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Published on:
17 May 2026 03:12 pm
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