
Rama Ekadashi 2026: कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर श्रीकृष्ण की पूजा का महत्व है। सुख-धन-संपदा के लिहाज से रमा एकादशी पर पूजा पाठ बहुत शुभफलदायक मानी जाती है। इस बार एकादशी तिथि दो दिन पड़ रही है। 4 नवंबर और 5 नवंबर को एकादशी है। ऐसे में रमा एकादशी व्रत किस दिन रखें, इस पर भ्रम उत्पन्न हो रहा है। विख्यात ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्यों ने शास्त्रोक्त विधि से इस असमंजस को दूर किया है। इसके अनुसार उदया तिथि के आधार पर रमा एकादशी व्रत 5 नवंबर को रखना उचित बताया गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई ने बताया कि रमा एकादशी पर व्रत रखकर श्रीकृष्ण और विष्णु पूजन सौभाग्यदायक होता है। पुराणों में इस व्रत का महत्व बताया गया है। इसके अनुसार रमा एकादशी पर व्रत रखकर विधि विधान से पूजा करने से श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन तुलसी पूजा भी फलदायी होती है।
रमा एकादशी पर स्नानादि के बाद सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि से श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा करना चाहिए। भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री का भोग जरूर लगाना चाहिए। यथासंभव गीता पाठ करें और शाम को फिर श्रीकृष्ण की पूजा कर प्रसाद बांटकर भोजन ग्रहण करना चाहिए।
मान्यता है कि रमा एकादशी पर व्रत रखते हुए पूजन करने से घनघोर पाप से भी मुक्ति मिल जाती है। पदम पुराण में कहा गया है कि इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या जैैसे महापाप से भी मुक्ति मिलती है। इस व्रत से जाने-अनजाने में हुए सभी प्रकार पापों का प्रायश्चित कर सकते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि दो दिन 4 और 5 नवंबर को रहेगी। ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य पंडित सोमेश परसाई, पंडित अरुण बुचके व पंडित नरेंद्र नागर के मुताबिक ऐसे समय पर शास्त्रों में उदया तिथि यानि सूर्योदय के समय तिथि का होना श्रेष्ठ माना गया है। इसको ध्यान में रखते हुए 5 नवंबर को रमा एकादश व्रत रखना उचित होगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (रमा) की पूजा करनी चाहिए।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक
व्रत पारण का समय: 6 नवंबर (सुबह सूर्योदय के बाद)