
Dhanteras 2026 : दिवाली पास आ चुकी है। महापर्व का उत्साह अलग ही दिखाई दे रहा है। दिवाली के स्वागत के लिए घरों में साफ-सफाई और सजावट का काम चल रहा है तो बाजारों में भी रौनक बढ गई है। कहीं रंग-बिरंगी रोशनी और सजावटी सामान की दुकानें सजी हैं तो कहीं दीपक, पूजन सामग्री, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी हो रही है। इस बार त्योहारों का कैलेंडर भी खास है, क्योंकि दिवाली छह दिनों तक चलेगी। इस दौरान एक ही सप्ताह में धन-संपदा की पूजा, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज जैसे पर्वों के साथ सोमवती अमावस्या का संयोग भी बन रहा है।
दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस के साथ होगी। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और नई वस्तुओं की खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर के पूजन का विशेष महत्व है।
ज्योतिष मठ संस्थान के पंचांग कार्यकर्ता पं. विनोद गौतम के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 6 नवंबर को सुबह 10.30 बजे से प्रारंभ होगी। धनतेरस पर शाम 5.41 से 8.12 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस दिन प्रदोष व्रत भी रहेगा। महालक्ष्मी और कुबेर पूजन के लिए शाम 6.5 से 8 बजे तक का समय श्रेष्ठ रहेगा।
पंडित गौतम ने बताया कि धनतेरस पर प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की जाती है। इस दिन शाम को घर के बाहर यम दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाएगा। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इस दिन बर्तन, सोना-चांदी और धातु की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। लोग खरीदारी कर शाम को दीपदान कर दीपोत्सव की शुरुआत करेंगे।
ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम ने बताया कि धनतेरस की पूजा को समृद्धि, संपन्नतादायक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन खरीदारी सहित सभी कार्य शुभ मानते हैं।