
नई दिल्ली। देशभर में आज (21 फरवरी 2020) महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जा रहा है। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था। ऐसा माना जाता हैं इस दिन शिवजी की पूजा और अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं, उतनी ही जल्दी नाराज भी जल्दी हो जाते हैं इसलिए शिवरात्रि के दिन और पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
पंचक में कुछ खास कर्मकांड वर्जित
इस साल महाशिवरात्रि का पर्व पंचक के बीच मनाया जाएगा। घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती इन पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहा जाता है। शास्त्रों में पंचक के दौरान कुछ खास कर्मकांड वर्जित माने जाते हैं। यानी महाशिवरात्रि के शुभ महोत्सव पर अगर पंचक लग रहा है तो इस दौरान भी कुछ कार्यों की एकदम मनाही होगी।
व्रतधारियों को ये खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले भक्तों के लिए कुछ विधि—विधान बनाए गए है। जिनका पालन करना जरूरी है। आइए जानते है कि व्रत रखने वाले भक्तों को कैसे पूजा-पाठ करनी चाहिए और कैसा खान-पान रखना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि व्रतधारियों को पर चावल, दाल और गेहूं से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि जो लोग शिवजी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं उन्हें फल, दूध, चाय, कॉफी आदि का भी सेवन करना चाहिए। कुछ लोग इस व्रत को निर्जला रखते हैं। वहीं कुछ भक्त फल और ड्राई फ्रूट्स का सेवन करते हैं। व्रतधारियों को कुट्टू का आटा और सेंधा नमक, आलू, साबुदाना, आलू की सब्जी और साबुदाने से बनी व्यंजन ही खाना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर इन चीजों से भी रहे दूर...
— महाशिवरात्रि के दिन मास या मदिरा नहीं लेना या खाना चाहिए।
— महाशिवरात्रि के दिन देर तक सोना नहीं चाहिए।
— अगर आप शिवजी को प्रसन्ना करना चाहते हैं तो इस दिन काले कपडे नहीं पहने।
— कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिवजी को चढ़ाया हुआ प्रसाद नहीं खाना चाहिए।
— किसी भी पशु को न तो सताना चाहिए और न हीं मारना चाहिए नहीं तो आपके सभी पुण्य फल नष्ट हो जाएंगे।
— इस दिन भूलकर भी घर में कलह नहीं करना चाहिए और न हीं किसी को अपशब्द बोलने चाहिए। वरना आपको भगवान शिव का आर्शीवाद प्राप्त नहीं होगा।
— शिवलिंग पर ना तो चंपा और केतली का फूल चढ़ाया जाता है और ना ही हल्दी से अभिषेक किया जाता है। शिवजी ने इन फूलों को शापित किया था, इसलिए इन फूलों का भोलेनाथ की पूजा में इस्तेमाल वर्जित है।