Avimukteshwaranand Magh Mela Controversy:: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वारानंद जी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इसमें बाबा बागेश्वर के साथ देश के बड़े साधु-संतों और कथावाचकों की एंट्री भी हो गई है। जानिए किसने क्या कहा?
Avimukteshwaranand Magh Mela Controversy: प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी और प्रशासन के बीच तनाव अब गंभीर टकराव में बदल गया है। शनिवार, 24 जनवरी की रात कुछ अज्ञात युवकों ने शंकराचार्य जी के शिविर में जबरन घुसने का प्रयास किया। इस दौरान स्वामी जी के शिष्यों के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की हो गई। हंगामे के दौरान इन हुड़दंगियों ने 'सीएम योगी जिंदाबाद' के नारे भी लगाए। इसी बीच शंकराचार्य ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिए तो प्रशासन पर केस करूंगा।
शंकराचार्य जी के समर्थकों का आरोप है कि उनके गुरु की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है। इसके चलते शिविर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और चारों तरफ 12 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। बावजूद इसके रोजाना कोई न कोई उन्हें परेशान करने आ रहा है।
अविमुक्तेश्वरानंद विवाद अब सिर्फ प्रशासन और स्वामी जी के बीच तक सीमित नहीं रह गया है। मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। इस पर लगातार खासकर विपक्ष की ओर से बयानबाजी हो रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य का समर्थन करते हुए भाजपा पर 'नकली सनातनी' होने का आरोप लगाया है।
इस पूरे विवाद को भाजपा के खिलाफ माना जा रहा है। इसी बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ की है। स्वामी जी बोले, "इनके डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समझदार' है। उन्होंने मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधा। प्रशासन ने शंकराचार्य को दो नोटिस जारी कर मेले से प्रतिबंधित करने की चेतावनी भी दी है।
विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरु हुआ। जब शंकराचार्य स्वमी अविमुक्तेश्वरानंद जी पालकी से स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान, अचानक पुलिस ने उन्हें स्नान करने से रोक दिया। तभी से स्वामी जी उनके शिष्यों के साथ शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। अब सरकार, प्रशासन और शंकराचार्य जी में ठनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, आदि शंकराचार्य द्वारा 8वीं शताब्दी में बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और श्रृंगेरी, ये चार पीठों स्थापित की गई थी। इन पीठों के सर्वोच्च आध्यात्मिक मुखियाओं को शंकराचार्य कहा जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा और अद्वैत वेदांत का प्रचार-प्रसार करना होता है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वर्तमान में ज्योतिर्मठ यानी बद्रीनाथ पीठ के शंकराचार्य हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद यह पद प्राप्त हुआ। वे धार्मिक व सामाजिक मुद्दों (जैसे ज्ञानवापी प्रकरण, पूर्व में राम मंदिर मुद्दा) पर अपनी प्रखर सक्रियता और वाणी के लिए जाने जाते हैं।