
Diwali 2026 : रोशनी, उल्लास और समृद्धि का महापर्व अब पास आ चुका है। धनतेरस से शुरू होने वाले दीपोत्सव में इस बार अमावस्या तिथि दो दिन रहने से एक दिन का उत्सव और जुड़ गया है। ऐसे में देश दुनिया में दीपोत्सव की रौनक 6 से 11 नवंबर तक यानि 6 दिनों तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि कार्तिक माह की अमावस्या तिथि का सबसे ज्यादा है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। कार्तिक अमावस्या पर भगवान शिव, माता त्रिपुर सुंदरी की उपासना भी शुभफलदायक होती है।
दिवाली की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार दीपोत्सव पांच के बजाय छह दिन का होगा। दिवाली के अगले दिन सोमवती अमावस्या होने से एक दिन की बढ़ोतरी हुई है। कई लोग दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाएंगे, हालांकि अधिकांश सामूहिक आयोजन 10 नवंबर को ही होंगे। वहीं कायस्थ समाज द्वारा भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को मनाया जाएगा।
इस बार बाजारों में धन तेरस और दिवाली के पहले ही खरीदारी का खासा उत्साह नजर आ रहा है। रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र और सोमवार को सोम पुष्य नक्षत्र के विशेष संयोग ने इसमें इजाफा किया। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में खरीदी गई वस्तुओं को स्थायित्व और समृद्धि देने वाला माना जाता है। यही वजह है कि पुष्य नक्षत्र पर बाजारों में जमकर खरीदारी की गई। इसके बाद से बाजार गुलजार हैं। लगातार तीन दिन के सर्वार्थ सिद्धि योग ने भी शुभ संयोग बढ़ा दिए।
6 नवंबर शुक्रवार धन तेरस: धनतेरस के साथ दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस मौके पर बाजारों में जमकर खरीदारी होगी।
7 नवंबर शनिवार रूप चौदस- दीपोत्सव के दूसरे दिन रूप चौदस का पर्व मनाया जाएगा। इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है।
8 नवंबर रविवार दिवाली: दिवाली पर्व पर घर-घर में सुख समृद्धि की कामना के साथ माता महालक्ष्मी की पूजा अर्चना होगी। देर रात तक रंगारंग आतिशबाजी होगी।
9 नवंबर सोमवार सोमवती अमावस्या: इस बार अमावस्या तिथि दो दिन रहेगी, जो अगले दिन सोमवार को भी विद्यमान रहेगी। ऐसे में इस दिन सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा।
10 नवंबर मंगलवार गोवर्धन पूजा - दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन किया जाएगा।
11 नवंबर बुधवार भाईदूज - दिवाली उत्सव का समापन भाईदूज के साथ होगा।