
पंचतत्वों पर आधारित वास्तु एक ऐसी विधा है जिसमें दिशाओं का बहुत महत्व माना गया है। वास्तु शास्त्र में हर स्थान या वस्तु की दिशा से संबंधित नियम बताए गए हैं। ऐसे में रसोई जो हमारे घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है उसकी और उसमें काम आने वाली चीजों का भी वास्तु से गहरा नाता होता है। रसोई में पकाया जाने वाला भोजन आपको शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ रखने में एक मुख्य भूमिका निभाता है। इसलिए वास्तु के मुताबिक यदि रसोई की दिशा गलत हो तो उसका नकारात्मक असर घर की महिलाओं पर सबसे पहले होता है। साथ ही सभी सदस्यों के जीवन में भी परेशानियां बढ़ सकती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु अनुसार रसोईघर से जुड़े वास्तु नियम...
1. रसोई की दिशा: वास्तु शास्त्र में घर में रसोई के लिए सबसे आदर्श दिशा पूर्व-दक्षिण दिशा यानी आग्नेय कोण में माना गया है। क्योंकि इस दिशा में रसोई होने से मंगल दोष दूर होता है जिससे जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं।
2. चूल्हे की दिशा: रसोईघर में चूल्हे का संबंध अग्नि तत्व से होता है। इसलिए रसोई में चूल्हा आग्नेय कोण में होना चाहिए। साथ ही चूल्हा रखने वाली स्लैब को पूर्व और दक्षिण दिशा को घेरते हुए बनवाना शुभ होता है।
3. चाकू का स्थान: अक्सर लोग चाकू या छुरी का इस्तेमाल करने के दौरान उसे कहीं भी रख देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि रसोईघर में चाकू को कभी भी इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। आपको चाकू रखने का एक स्थान सुनिश्चित कर लेना चाहिए। अन्यथा इससे परिवार के लोगों के क्रोध में वृद्धि होती है और साथ ही रिश्तों में भी तनाव पैदा होने लगता है।
4. मसाले और बर्तन: वास्तु नियमों के आधार पर भोजन पकाने में इस्तेमाल आने वाली चीजें जैसे दाल, अनाज, मसाले, तेल, आटा और बर्तन, क्रॉकरी आदि के लिए भंडारण कक्ष को पश्चिम या दक्षिण दिशा में बनवाना शुभ होता है।
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