
रीवा। समर्थन मूल्य पर की जाने वाली खरीदी में एक नया घपला सामने आया है। प्रदेश के कई जिलों में इस तरह की मनमानी की गई है जिसमें अनाज बिक्री करने वाले किसानों के खाते की जगह समितियों या अन्य के खाते का उपयोग किया गया है। छतरपुर जिले में यह पकड़ में आया था, जिसकी जांच की जा रही है। रीवा में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं। प्रथम दृष्टया रीवा जिले में 39 खातों पर संदेह जताया गया है, जिनसे कई किसानों के नाम पर खरीदी की गई है और इसी में राशि भी भेजी गई है।
राज्य सरकार ने जिला सहकारी बैंक के सीईओ को पत्र लिखकर कहा है कि इस मामले की जांच कराएं। इन खातों से कितनी राशि आहरित की गई है, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले ही सेमरिया क्षेत्र के भमरा पंचायत के किसान ने इसकी शिकायत की थी जिसमें कहा था कि उनके नाम पर धान बिक्री बताई जा रही है लेकिन उनके खाते में राशि नहीं पहुंची है। मामले में जांच के लिए कहा गया था लेकिन अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हुई है। इसी बीच प्रदेश स्तर पर गड़बड़ी होने की शिकायत की गई है।
पंजीयन के दौरान हुई थी गड़बड़ी
बताया जा रहा है कि किसानों के पंजीयन के दौरान समितियों और बैंक की ब्रांच में गड़बड़ी की गई थी। किसानों के स्वयं का बैंक खाता न लिखते हुए समिति का खाता अधिकांश स्थानों पर लिखा गया था और राशि भी उन्हीं खातों पर गई है। इसके अलावा कुछ किसानों के खाते में पांच से दस किसानों की अलग-अलग खरीदी की गई है। जानकारी मिली है कि 890 खातों को जांच में शामिल किया गया है, जिसमें 1898 किसानों के नाम पर खरीदी हुई थी। अभी शासन ने 39 खातों की ही रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद अन्य की भी जांच होगी।
सभी ब्रांचों और समितियों से मांगी रिपोर्ट
शासन का पत्र जांच कराए जाने के लिए आने के बाद जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सभी ब्रांचों और सहकारी समितियों को पत्र लिखकर खरीदी से जुड़ी जानकारी मांगी है। साथ ही उन 39 खातों की जांच करने के लिए भी कहा है, जिनसे कई किसानों ने धान की बिक्री खरीदी केन्द्रों में की थी। माना जा रहा है कि इस मामले में सहकारी बैंक के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
यूपी की धान खरीदी पर पहले भी हो चुका है घपला
रीवा उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ जिला है। करीब दर्जन भर खरीदी केन्द्र यूपी की सीमा के नजदीक हैं। यहां पर उत्तर प्रदेश से सस्ते दर पर धान खरीदने के बाद एमपी के समर्थन मूल्य पर बेचा जा रहा है। इसके पहले इस कारोबार में जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों और समितियों के प्रबंधकों की भूमिका संदिग्ध पाई जा चुकी है। विधानसभा में भी धान खरीदी का मामला गूंजा था। इस बार भी माना जा रहा है कि यूपी की धान समर्थन मूल्य पर बिक्री करने के लिए इस तरह का हथकंडा अपनाया गया होगा। हालांकि अभी मामला जांच में है, रिपोर्ट आने के बाद ही वस्तुस्थिति स्पष्ट होगी।
भुगतान पर लगाई रोक
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय के आयुक्त ने कलेक्टर को पत्र भेजकर कहा है कि ई-उपार्जन पोर्टल पर एक बैंक खाते का कई किसानों के नाम पर उपयोग किया है। इस मामले की जब तक जांच पूरी नहीं कराई जाए तब तक समर्थन मूल्य पर की गई खरीदी पर भुगतान नहीं किया जाए। अब किसानों को बेची गई धान की राशि के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
सभी ब्रांचों से मांगी रिपोर्ट
जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम मिश्रा ने बताया कि कई ऐसे खाते हैं जिनमें एक से अधिक किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य में खरीदी की गई है। शासन से 39 खातों की जांच कराए जाने के लिए निर्देश मिला है। जिस पर सभी ब्रांचों और समितियों को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है।