योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ...
रीवा। पढ़ाई के बाद नौकरी ढूंढऩे के बजाए युवा खुद का व्यवसाय करें और दूसरों को भी रोजगार दें। इस उद्देश्य को प्रदेश सरकार की ओर से भले ही मुख्यमंत्री के नाम की तमाम योजनाएं शुरू की गई हों। इसके बावजूद स्थिति ढाक के तीन पात जैसी है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की ओर से शुरू योजनाओं में अब तक स्वीकृत प्रकरणों की स्थिति कुछ ऐसा ही बयां कर रही है।
औपचारिकता युवाओं की राह का रोड़ा
मुख्यमंत्री के नाम की शुरू ज्यादातर योजनाओं में युवाओं का सपना निर्धारित नियम कायदों को पूरा करने के फेर में टूट रहा है। खासतौर पर बैंकों की औपचारिकता युवाओं की राह का रोड़ा बन रहा है। पूरी कोशिश के बावजूद ज्यादातर युवा बैंकों के नियम कायदों को पूरा नहीं कर पा रहा है। नतीजा फाइल संबंधित बैंक में महीनों डंप रहने के बाद रिजेक्ट कर दी जाती है और युवाओं के सपनों का प्रोजेक्ट धराशायी हो जाता है।
स्वीकृत प्रकरणों की संख्या नाम मात्र की
केंद्र की ओर से संचालित चार योजनाओं में से दो में जहां स्वीकृत प्रकरणों की संख्या नाम मात्र की है। वहीं बाकी की दो योजनाओं में अभी एक भी प्रकरण स्वीकृत नहीं किए जा सके हैं। जबकि नए वित्तीय वर्ष का चार महीना पूरा होने वाला है। गौरतलब है कि खुद का उद्यम स्थापित करने की मंसा से योजनाओं में आवेदन करने वाले युवाओं की संख्या लक्ष्य से अधिक है।
योजनाएं, लक्ष्य व स्वीकृत प्रकरण
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 600 लक्ष्य, केवल 89 युवाओं को मिला लाभ। मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में 288 लक्ष्य, एक को भी नहीं मिला लाभ। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में 40 लक्ष्य, केवल दो युवाओं को लाभ मिला। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 40 का लक्ष्य है। लेकिन एक भी अभी तक लाभ नहीं मिला।
बैंकों की ये औपचारिकता राह का रोड़ा
- आवेदनकर्ता द्वारा तैयार प्रोजेक्ट रिपोर्ट की स्वीकृति
- संबंधित व्यवसाय में हर हाल में सफल होने की गारंटी
- असफलता की स्थिति में ऋण जमा कर देने का प्रमाण
- बैंक में अच्छी मार्केट इमेज साबित करने की चुनौती
- आधार व पैन कॉर्ड सहित अन्य कई दस्तावेजों की पूर्ति