जमीन नहीं कर पा रहे सुरक्षित...
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर में अतिक्रमण करने को खुली छूट दे दी गई है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों की उदासीनता कुछ ऐसा ही बयां कर रही है। परिसर का सीमांकन हुए पांच वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद अधिकारी विश्वविद्यालय की भूमि को सुरक्षित कर पाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
जमीन को दो भागों में बांटती हुई बन गई सडक़
विश्वविद्यालय की जमीन को दो भागों में बांटते हुए कैलाशपुरी मोहल्ले के लिए सडक़ बनाए जाने पर कुछ दिन भले ही हंगामा मचा हो। लेकिन अब छात्रसंघ पदाधिकारी से लेकर प्राध्यापक व विश्वविद्यालय अधिकारी सभी चुप्पी साध कर बैठ गए हैं। जबकि विश्वविद्यालय परिसर के खुलेआम अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। अतिक्रमण को लेकर कहने को तो भले ही अधिकारियों की ओर से कागजी खानापूर्ति की गई हो, लेकिन हकीकत में अधिकारी जमीन को बचाने में उतने सक्रिय नहीं हैं, जितनी सक्रियता की जरूरत है।
सीमांकन के बावजूद नहीं बना सके बाउंड्रीवाल
विश्वविद्यालय की जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए करीब पांच वर्ष भूमि के ज्यादातर हिस्से का सीमांकन कराया गया। सीमांकन होने के बाद मुख्य मार्ग के दायीं तरफ जमीन को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्रीवाल का निर्माण तो करा लिया गया, लेकिन बायीं तरफ के हिस्से को खुला छोड़ रखा है। हालांकि कैलाशपुरी मोहल्ले के पास कुछ हिस्सों में सीमांकन नहीं हो सका है। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन उन भूमि के उन हिस्सों को भी बाउंड्रीवाल कराकर सुरक्षित नहीं कर पा रहा है, जिसका सीमांकन हो गया है।
परिसर के खुले हिस्सों में हो रहा अतिक्रमण
विश्वविद्यालय परिसर के कैलाशपुरी मोहल्ले की तरफ का हिस्सा हो या फिर गायत्री नगर व वासुदेव नगर की ओर की जमीन हो। हर जगह अतिक्रमणकारी विश्वविद्यालय की जमीन की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन सीमांकन वाली जमीन में बाउंड्रीवाल बनाने की जरुरत नहीं समझ रहा है।
अधिकतम एक करोड़ रुपए का है खर्च
विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की माने तो सीमांकन वाली जमीन में बाउंड्रीवाल बनाने का अधिकतम खर्च एक करोड़ रुपए आएगा, लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारी गौरफरमाने की जरूरत समझ रहे हैं। लापरवाही जारी रही तो धीरे-धीरे विश्वविद्यालय की और भी जमीन अतिक्रमण की चपेट में होगी।
फैक्ट फाइल:-
283 एकड़ एपीएस का कुल रकबा
225 एकड़ परिसर का चिह्नित रकबा
20 एकड़ में हो चुका है अतिक्रमण