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प्राचार्य ने दिया ऐसा करारा जवाब कि अधिकारी की बोलती हो गई बंद, निरीक्षण करने पहुंचे थे स्कूल, जवाब सुन आप भी चौंक जाएंगे

जवाब सुन वापस लौटे...
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रीवा

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Ajit Shukla

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Updated: 26 Jul 2018, 12:25 PM IST

Teacher post vacant of govt school in Rewa, student's studies stop

Teacher post vacant of govt school in Rewa, student's studies stop

रीवा। साहब, स्कूल में जब शिक्षक ही नहीं हैं तो काहे का बेसलाइन टेस्ट और काहे का ब्रिज कोर्स। अकेले छात्रों को प्रवेश लेने में लगा हुआ हूं। स्कूल में निरीक्षण के लिए पहुंचे एक शिक्षा अधिकारी को यह जवाब शासकीय हाइस्कूल छुहिया के प्राचार्य से मिला। शिक्षा अधिकारी भी क्या करते चुपी साधे वापस लौट आए। यह हाल छुहिया स्कूल जैसे कई दूसरों शासकीय विद्यालयों का भी है। जिस पर अधिकारी गौर फरमाने की जरूरत नहीं समझ रहे हैं।

स्कूलों का निरीक्षण कर रहा चार दल
शासन स्तर के अधिकारियों की लापरवाही के चलते उन स्कूलों में बुरी स्थिति बनी हुई है, जो शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। शासन स्तर के अधिकारियों के निर्देश पर विद्यालयों में बेस लाइन टेस्ट और ब्रिज कोर्स संचालित करने का आदेश जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीइओ) की ओर से शिक्षा अधिकारियों का चार दल गठित कर निरीक्षण की कवायद भी शुरू कर दी गई है। लेकिन विद्यालयों में शिक्षकों के अभाव में कैसे बेसलाइन टेस्ट होगा और कैसे ब्रिज कोर्स संचालित होगा, इस पर अधिकारियों ने गौर नहीं फरमाया है। नतीजा विद्यालय में एक ओर जहां अव्यवस्था की स्थिति है। वहीं दूसरी ओर छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

डेडलाइन खत्म होने के बाद आएंगे अतिथि शिक्षक
करीब डेढ़ महीने की लेटलतीफी के साथ विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों के नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन जब तक विद्यालयों में अतिथि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर कार्यभार ग्रहण करेंगे। तब तक ब्रिज कोर्स के संचालन के बावत निर्धारित डेडलाइन पूरी हो चुकी होगी। गौरतलब है कि शासन स्तर से अगस्त के पहले सप्ताह तक ब्रिज कोर्स पूरा कर इंडलाइन टेस्ट लिए जाने का निर्देश है।

वस्तुस्थिति के वाकिफ हैं दल के शिक्षा अधिकारी
विद्यालयों के निरीक्षण के लिए सीइओ की ओर से गठित दल में शामिल शिक्षा अधिकारी शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों की स्थिति से वाकिफ हैं। यह बात और है कि शासन स्तर के व वरिष्ठ अधिकारियों की निर्देशों के पालन की खानापूर्ति में लगे हुए हैं। शायद यही वजह है कि वस्तुस्थिति से वाकिफ दलों में शामिल शिक्षा अधिकारी दो दर्जन विद्यालयों का भी निरीक्षण नहीं कर सके हैं।

यह विद्यालय भी है उदाहरण

शासकीय हाइस्कूल दुअरा में एक भी शिक्षक नहीं हैं। नतीजा बेसलाइन टेस्ट व ब्रिज कोर्स संचालन की बात तो दूर छात्रों के प्रवेश की प्रक्रिया भी अधर में लटकी हुई है। पूर्व से पंजीकृत छात्र-छात्राओं का भविष्य अधिकारियों की उदासीनता के चलते दांव पर लग गया है।

शासकीय हायर सेकंडरी विद्यालय पूर्वा भी शिक्षकों की कमी के चलते अव्यस्था का दंश झेल रहा है। विद्यालय में प्राचार्य के अलावा केवल एक शिक्षक है। नतीजा सारी कवायद केवल प्रवेश तक सीमित है। विद्यालय का इसी वर्ष हायर सेकंडरी में उन्नयन हुआ है।