Former Mauganj MLA Laxman Tiwari-
MP Congress- एमपी के एक बड़े कांग्रेस नेता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और संगठन पर गंभीर आरोप लगाए। मऊगंज के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है। उन्होंने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और संगठन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी हावी है और संगठन के प्रति कोई गंभीर नहीं है। पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने प्रदेश कांग्रेसाध्यक्ष जीतू पटवारी सहित स्थानीय नेताओं पर अनदेखी के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वह किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन जन आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि तिवारी पहले बीजेपी में थे।
पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने बताया कि उन्होंने 2 अप्रैल 2024 को कांग्रेस की सदस्यता ली थी, लेकिन इसके बाद से ही पार्टी के भीतर उपेक्षा का माहौल बनने लगा। उन्होंने कई बार वरिष्ठ नेताओं को इस स्थिति से अवगत कराने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर तक किसी ने भी उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।
लक्ष्मण तिवारी ने आरोप लगाया कि मऊगंज क्षेत्र में उनके बड़ी संख्या में समर्थक हैं, इसके बावजूद पार्टी के कार्यक्रमों में उन्हें नहीं बुलाया जाता था। जब उन्होंने स्वयं कार्यक्रम आयोजित करने का प्रयास किया तो उसमें भी बाधाएं उत्पन्न की गईं।
इस्तीफे के दौरान लक्ष्मण तिवारी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित रीवा और मऊगंज इकाई के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ चुनिंदा लोग ही फैसले ले रहे हैं और बाकी नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
मऊगंज में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति से नाराज होकर तिवारी ने मंच से आपत्तिजनक बयान दिया था। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद से ही उन्होंने पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी।
लक्ष्मण तिवारी का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वे सवर्ण समाज पार्टी, भारतीय जनशक्ति पार्टी, भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2023 में समाजवादी पार्टी की टिकट पर विधानसभा चुनाव हारने के बाद वे कांग्रेस में आए थे, लेकिन यहां भी अधिक समय तक नहीं रह सके।