
MP News: मध्य प्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त और EOW रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत (Bribe) लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही हैं लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले का है जहां एक पंचायत के सचिव को ठेकेदार से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए EOW की टीम ने रंगेहाथों पकड़ा है।
ठेकेदार प्रकाश यादव ने EOW कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने मऊगंज जिले की हनुमना जनपद की बलभद्रगढ़ ग्राम पंचायत में पीसीसी रोड का निर्माण किया था। रोड का निर्माण कार्य करने के बाद उसने 12 मई को कार्य के बदले भुगतान का आवेदन किया था। भुगतान पंचायत सचिव के डीएससी सिग्नेचर और ओटीपी जनरेट होने के बाद ही संभव था और इसके एवज में पंचायत सचिव शरचचंद्र गिरी उससे एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है।
EOW ने फरियादी की शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर गुरुवार को रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये देने के लिए फरियादी प्रकाश यादव को रिश्वतखोर सचिव शरदचंद्र गिरी के पास भेजा। शरदचंद्र गिरी ने जैसे ही रिश्वत की रकम ली तो EOW की टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया। कार्रवाई से पूरी पंचायत में हड़कंप मच गया। एसपी EOW अरविंद ठाकुर ने बताया कि पंचायत सचिव ने पीसीसी रोड निर्माण के एवज में रुपए की मांग की थी जिसकी शिकायत पीड़ित ने कार्यालय में की थी। शिकायत की तस्दीक कर ट्रैप कार्रवाई की गई है और दस हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इससे पहले गुरुवार को ही मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए एसडीएम के स्टेनो सौरभ यादव को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा था। एसडीएम का स्टेनो सौरभ यादव तेंदूखेड़ा के रहने वाले संजय राय से कॉलोनी निर्माण का नक्शा प्रस्तावित करने के एवज में 30 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था जिसकी शिकायत फरियादी संजय राय ने जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में की थी। शिकायत पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और रिश्वत लेते हुए स्टेनो को एसडीएम कार्यालय से रंगेहाथों पकड़ा।