रीवा

उच्च शिक्षा में सरकार की व्यवस्था पर उठी उंगली, गिनाई गई कई खामियां

उच्च शिक्षा की चुनौतियों पर चर्चा...

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Jul 01, 2018
National Seminar in Rewa's APS, Interest in Govt Higher Education

रीवा। बदलते समय के साथ शिक्षण प्राविधि में तकनीक की प्रयोग अति आवश्यक हो गया है। इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उक्त विचार राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान भोपाल पूर्व निदेशक व रसायनशास्त्री प्रो. विजय अग्रवाल ने व्यक्त किया।

शैक्षणिक व्यवस्था में तकनीकी जरूरी
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. अग्रवाल ने कहा कि तकनीकी के माध्यम से वर्तमान में छात्र देश-विदेश के प्राध्यापकों के संपर्क में हैं। अभी भी तकनीकी का बेहतर उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है। आज के दौर में इंटरनेट, वेबनार और इ-क्लास जैसे माध्यम खासतौर पर शोध छात्रों की राह आसान कर सकते हैं।

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बेहतर रही है पूर्व की शिक्षा प्रणाली
निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश पाण्डेय ने बतौर विशेषज्ञ ने मूल्यपरक शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम के बजाए हमे अपनी प्रणाली को विकसित कर शैक्षणिक गुणवत्ता प्राप्त करना चाहिए। प्रो. पाण्डेय ने पूर्व की भारतीय शिक्षा प्रणाली को बेहतर करार दिया और कहा कि उसी का अनुसरण करना चाहिए।

इन विशेषज्ञों ने भी रखे विचार
डॉ. शशांक पाण्डेय ने उच्च शिक्षा में बजट की कमी, डॉ. सुनील पाण्डेय ने शिक्षा में योग्य शिक्षकों की कमी, प्रो. अंजली श्रीवास्तव ने नीतियां बनाते समय ग्रामीण परिवेश की आवश्यकता, प्रो. आरएन सिंह ने कहा नए प्रयोग से शिक्षा की दुर्गति पर प्रकाश डाला। प्रो. मृणाल श्रीवास्तव ने पाठ्यक्रमों में बदलाव, प्रो. सुनील पाण्डेय ने विश्वबैंक के हस्तक्षेप से स्थिति गंभीर होने की बात कही।

50 शोध पत्रों की हुई प्रस्तुति
दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में कुल 50 शोध पत्रों के जरिए उच्च शिक्षा की स्थिति पर प्रकाश डाला गया। सेमिनार के समापन पर विशेषज्ञ के रूप में किरण जोशी ने आईटी के उपयोग पर, डॉ नईमुद्दीन ने प्रारंभिक शिक्षा का उच्च शिक्षा में प्रभाव व डॉ. जीएन सिंह ने निजी महाविद्यालयों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला।

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