Iran-Israel War : रीवा का एक यंग रिसर्चर शैलेन्द्र मिश्रा ईरान और इजराइल के बीच जारी जंग के दौरान इजराइल में फंसे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, इजराइल में ईरान द्वारा लगातार मिसाइलें दागी जा रही हैं।
Iran-Israel War : भारत के दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के रीवा का एक यंग रिसर्चर शैलेन्द्र मिश्रा ईरान और इजराइल के बीच चल रही जंग में इजराइल में फंसे है। मिली जानकारी के अनुसार, इजराइल में ईरान द्वारा लगातार मिसाइलें दागी जा रही हैं। इससे युवक का परिवार चिंतित है। हालांकि, इजराइल गए रीवा के युवक ने वीडियो जारी कर खुद को सुरक्षित बताया है। परिवार ने भारत सरकार से इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस युद्ध ने हजारों भारतीय परिवारों के मन में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। क्योंकि, 10 हज़ार से ज्यादा भारतीय इस समय इजराइल में मौजूद हैं। रीवा के रहने वाले शैलेन्द्र मिश्रा भी इजराइल में हैं। शैलेन्द्र साल 2024 में रिसर्च के सिलसिले में इजराइल गए थे। वो इस समय इजराइल की बारइलान-यूनिवर्सिटी में रिसर्चर के तौर पर कार्यरत हैं, जिस प्रकार ईरान लगातार इजराइल पर मिसाइलें दाग रहा है, उससे परिवार के लोगों में चिंता बनी हुई है।
शैलेन्द्र के भाई संजय मिश्रा का कहना है कि, 'भारत सरकार को ईरान और इजराइल में फंसे भारतीयों की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए। भारतीयों सुरक्षित वापसी की पहल करनी चाहिए। वहीं, इजराइल में कार्यरत रीवा के शैलेन्द्र ने वीडियो जारी कर वहां की स्थिति परिजनों को बताई है। इसमें बताया 'इजराइल में सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त है और हर नागरिक को आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी स्पष्ट गाइडलाइन है। वहां मकान बनाने के साथ ही बंकर बनाने का नियम है। इसके अलावा इजराइल में सुरक्षा व्यवस्था बहुत तगड़ी है। वहां का सुरक्षा तंत्र बहुत मजबूत है, अधिकांश मिसाइलें फेल हो रही हैं। लेकिन, रह-रहकर लगातार धमाके भी हो रहे हैं।'
भाई ने कहा कि, 'हमें अपने भाई की चिंता तो है, लेकिन जितने भी भारतीय वहां हैं, उनकी भी उतनी ही चिंता है। इजराइल में जो भी बिल्डिंग बनती हैं, उसके नीचे बंकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई ऐसे हालात बनते हैं तो बंकर में छुपा जा सके।' संजय मिश्रा ने प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री से पहल करने की अपील की है। शैलेन्द्र का साल 2024 में इजराइल की प्रतिष्ठित बारइलान-यूनिवर्सिटी मे रिसर्चर के तौर पर चयन हुआ था। वो पिछले डेढ़ साल से वही रह रहे हैं।