
रीवा। रीवा जिले में गुढ़ विधानसभा कई बार अप्रत्याशित परिणाम देने के लिए चर्चित रहा है। किसी एक दल या एक विचारधारा वाले नेता को लंबे समय तक प्रतिनिधित्व नहीं मिला। कई ऐसे प्रयोग हुए जिससे प्रदेश भर में यह सीट सुर्खियों में आई। दूसरे विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में यहां विकास काफी पीछे छूट गया है। इसी के चलते हर बार विकास मुद्दा बनता है लेकिन वोटिंग होते-होते यह जातियों और व्यक्तियों के बीच आ जाता है।
वर्ष 2013 के चुनाव में गुढ़ सीट में चतुष्कोणीय मुकाबला रहा। यहां सीधे मुकाबले की संभावना थी लेकिन जिस तरह से परिणाम आए वह चौकाने वाले थे। यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच अंतर महज 13 सौ वोटों का रहा। इसी तरह बसपा के मुनिराज पटेल और निर्दलीय कपिध्वज सिंह 25 हजार से अधिक वोट पाए थे। इस बार के चुनाव में वही चारों प्रमुख प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके बीच पूर्व में कड़ा मुकाबला रहा है। परिस्थितियां इस बार क्षेत्र में बदली नजर आ रही हैं। प्रचार के अभियान पर जिस तरह से भीड़ प्रत्याशियों के साथ जुट रही है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि चौकाने वाला परिणाम हो सकता है। पूर्व के चारों प्रमुख प्रत्याशी प्रचार-प्रसार में एक-दूसरे से कम नहीं हैं।
कांग्रेस से सुंदरलाल तिवारी, भाजपा से नागेन्द्र सिंह, बसपा से मुनिराज पटेल एवं पूर्व में निर्दलीय प्रत्याशी रहे कपिध्वज सिंह इस बार समाजवादी पार्टी से मैदान में हैं। पिछले चुनाव में चारों प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर महज सात हजार का था। प्रत्याशी वही हैं लेकिन इस बार पस्थितियां बदली हैं। परिणाम क्या होगा, यह कह पाना मुश्किल है। पिछले चुनाव परिणाम के चलते यहां कई सर्वे एजेंसियां पहुंच रही हैं। सीएम शिवराज की सभा हो चुकी है, सपा के अखिलेश यादव का भी कार्यक्रम है। सभी दल अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयास में जुटे हैं। पिछले चुनाव में तीनों राजनीतिक दलों का अपना आधार वोट बैंक था, इस कारण अनुमान लगाया जा रहा था कि वह मजबूत स्थिति में हैं लेकिन पहली बार राजनीतिक मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी कपिध्वज सिंह को मिले वोटों ने सबको चौंका दिया था। लंबे अंतराल के बाद किसी निर्दलीय प्रत्याशी ने इस तरह से दमदार उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस बार भी उन्हीं चारों के बीच मुकाबला है।
प्रमुख दलों के सामने ये हैं चुनौती
भाजपा- प्रत्याशी नागेन्द्र सिंह की मुश्किलें इसलिए बढ़ रही हैं कि पिछला चुनाव हारने के बाद लंबे समय तक वह निष्क्रिय रहे। सरकार के खिलाफ विरोध का सामना भी उन्हें करना पड़ रहा है। एससीएसटी वर्ग के वोट पर पकड़ मजबूत बनाई है।
कांग्रेस- सुंदरलाल तिवारी पांच साल तक विधायक रहे तो कुछ जगहों पर लोगों की अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं कर पाने का विरोध झेलना पड़ रहा है। हालांकि इनका जातिगत बड़ा वोट बैंक क्षेत्र में है। इसलिए नाराज वोटरों की भरपाई करने के प्रयास में हैं।
बसपा- बसपा का अपना आधार वोट और प्रत्याशी का जातिगत वोट मजबूती का कारण बन रहा है लेकिन जीत की स्थिति में पहुंच पाएंगे यह मतगणना में ही स्पष्ट होगा। पिछले चुनाव में यही प्रत्याशी थे और तीसरे नंबर पर रहे।
सपा- पिछले चुनाव में निर्दलीय रहे कपिध्वज सिंह इस बार समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी हैं। उन्होंने स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का नारा क्षेत्र में दिया है। भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी क्षेत्र के बाहर के निवासी हैं। इनके अपने गांव के क्षेत्र बड़ा वोटबैंक है। सपा के निष्क्रिय हो चुके कार्यकर्ताओं को जोड़ा है। पूर्व की अपेक्षा चुनाव प्रचार इस बार व्यापक नजर आ रहा है। इनके समर्थकों की मानें तो क्षेत्र में जिसका भी मुकाबला होगा, इन्हीं से होगा।
- ये मुद्दे चुनाव में हो रहे हावी
- स्थानीय बनाम बाहर से आए प्रत्याशी।
- सोलर प्लांट बदवार में स्थानीय लोगों को रोजगार की समस्या।
- स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति।
- सडक़ और पानी की क्षेत्र में बड़ी समस्या।
- पहडिय़ा गांव में निगम का क्लस्टर कचरा संयंत्र।
- स्किल डेवलपमेंट के संसाधन।
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पिछले चुनाव में यह रहा परिणाम
वर्ष 2013
कांग्रेस- सुंदरलाल तिवारी,- 33741
भाजपा- नागेन्द्र सिंह- 32359
बसपा- मुनिराज पटेल- 26099
निर्दलीय- कपिध्वज सिंह- 25510
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2008
भाजपा नागेन्द्र सिंह, 31689
कांग्रेस, राजेन्द्र मिश्रा 20311-
बसपा- नारायण मिश्रा-17699
2003
भाजपा, नागेन्द्र सिंह, 37441
कांग्रेस, साधना कुशवाहा- 9028
बसपा, विद्यावती पटेल - 33897