
भाजपा को किसानों के बारे में बोलने का नैतिक हक नहीं
प्रदेश के भाजपा नेता राजनीतिक हित पूर्ति के लिए किसान हितों की बातें कर रहे हैं
तुमकूरु. उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि भाजपा नेताओं को किसानों की समस्याओं के बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याएं हल करने के लिए केंद्र सरकार को कार्रवाई करने की जरूरत है लेकिन केंद्र कोई सहायता नहीं करती है।
परमेश्वर ने बुधवार को कहा कि गन्ने का खरीद मूल्य केंद्र सरकार तय करती है लिहाजा केंद्र सरकार गन्ना उत्पादकों की समस्याएं हल करने की दिशा में कार्रवाई करे। लेकिन केंद्र सरकार इस तरह बर्ताव कर रही है मानो उसका इससे कोई सरोकार ही नहीं है। ऐसे में राज्य के भाजपा नेताओं को किसानों की समस्याओं के बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेता राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए किसानों के हितों की बातें कर रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि उनमें किसानों के प्रति कोई हमदर्दी नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा तय की जाने वाली एफआरपी दरें बदलती रहती हैं। इसी आधार पर चीनी मिल मालिक गन्ने की खरीद दर तय करते हैं। कई बार किसानों को एफआरपी दरों से अधिक मूल्य मिलता है तो कई बार कम मिलता है। इसी वजह से चीनी कारखानों के मालिक किसानों के साथ हुए अनुबंध का पालन नहीं कर रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर सरकार किसानों की सहायता के लिए चीनी मिलों को धन देती है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने प्रति टन गन्ने के लिए 450 रुपए का समर्थन मूल्य दिया था। चीनी मिल मालिकों के 2017-18 के अनुबंध के अनुसार धन का भुगतान नहीं करने की वजह से गन्ना किसान आंदोलन कर रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों व चीनी मिल मालिकों के साथ बैठक की है। उन्होंने कहा कि बेलगावी अधिवेशन के दौरान गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं के संबंध में निर्णय किया जाएगा। इस मौके पर सांसद मुद्द हनुमेगौड़ा भी परमेश्वर के साथ थे।
Published on:
22 Nov 2018, 10:48 PM IST
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