आधे एकड़ में 1000 पौधों का बाग हुआ तैयार...
रीवा। एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद दूसरे की चाकरी करने के बजाए खुद का व्यावसाय स्थापित करें। इस योजना के साथ देऊर कोठार के अपूर्व सिंह ने पैतृक जमीन में खेती करने का निर्णय लिया। महज तीन वर्ष की मेहनत के बाद अब वह एक वर्ष में 15 लाख रुपए तक की कमाई करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
लगाए एक हजार अनार के पौधे
अपूर्व ने तीन वर्ष पहले गांव की जमीन पर पांच एकड़ में अनार के एक हजार पौधे लगाए। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजेश सिंह से मशविरे के बाद उन्होंने अनार का बगीचा पूरी तरह से तैयार कर लिया है। वैसे उन्हें बगीचे से अनार की उपज एक वर्ष बाद से ही मिलने लगी थी। लेकिन उपज का व्यावसायिक प्रयोग अब वह तीसरे वर्ष से करने की तैयारी में हैं।
70 क्विंटल उपज मिलने की उम्मीद
बागीचे के पौधों में फूल आने के साथ ही फल भी लगने लगे हैं। अपूर्व के मुताबिक एक महीने बाद से उनकी उपज बाजार में पहुंचने लगेगी। उन्हें जुलाई तक बगीचे से 70 क्ंिवटल उपज मिलने की उम्मीद है। जिसकी उन्हें कम से कम पांच लाख रुपए की आमदनी होगी।
एक वर्ष में तीन बार मिलेगा उपज
वैज्ञानिकों के हवाले से अपूर्व का कहना है कि उन्हें एक वर्ष में बागीचे से तीन बार उपज मिलेगी। इस तरह वह एक वर्ष में कम से कम 15 लाख रुपए की उपज बेच सकेंगे। व्यापारियों ने बागीचे के अनार खरीदने की एडवांस बुकिंग करा ली है। अपूर्व के बाग के अनार यहां रीवा के साथ आस-पास के जिलों में बिकेंगे। दो सीजन में उनकी पूरी लागत निकल आएगी। बागीचा तैयार करने में उन्हें करीब 8 लाख रुपए की पूंजी लगानी पड़ी है।
पिता व दोस्तों से मिली खेती की प्रेरणा
अपूर्व बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान वे इंटर्नशिप के लिए पूना गए थे। जहां उनकी मुलाकात नासिक के कुछ युवाओं से हुई। दोस्ती बढऩे के बाद उन्होंने खेती में कॅरियर आजमाने की बात कही। अपूर्व को भी बात में दम लगा। इंजीनियर पिता रावेंद्र सिंह से इच्छा जाहिर की तो उन्होंने भी हौसला बढ़ाया। नतीजा सफलता सामने खड़ी है। बाग से उन्हें अब कम से कम अगले पांच वर्ष तक उपज मिलेगी। इसके साथ ही वह नए पौधे भी लगाते जाएंगे।
ऐसे समझिए मुनाफे की गणित
70 क्विंटल उपज प्रति सीजन में
75 रुपए प्रति किलोग्राम औसत कीमत
5.25 लाख रुपए एक सीजन की आमदनी
3 बार एक वर्ष में मिलेगी उपज
15.25 लाख रुपए एक वर्ष की आमदनी
8 लाख रुपए अब तक बागीचे में लागत