
Rewa News : मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही गांव में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में कांग्रेस ने 'डेरा डालो-घेरा डालो' आंदोलन की शुरुआतकर दी है। दो दिवसीय इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस नेताओं ने किसानों की जमीन, जल संसाधनों, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे उठाते हुए परियोजना के संभावित प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं, आंदोलन में शामिल हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आयोजन के दौरान आंदोलनकारी विमला आदिवासी की मौत को लेकर प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया तो वहीं, सरकार से कई सवाल भी किए।
नेता प्रतिपक्ष ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि, रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सरई में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ चल रहे जन आंदोलन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाली स्व. विमला कोल जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और आंदोलन में शामिल होकर प्रभावित लोगों की आवाज़ बुलंद की। आदिवासी महिला विमला कोल जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। रीवा की जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सरकार को न्यूक्लियर पावर प्लांट की मंजूरी रद्द करनी ही होगी।
कार्यक्रम के दौरान उमंग सिंघार ने कहा कि, 'मैं वचन देता हूं, 'मनगवां, रीवा' में जन-इच्छा के खिलाफ लग रहा 'न्यूक्लियर पावर प्लांट' नहीं बनने दिया जाएगा! तानाशाही के चरम पर पहुंच चुकी ये सरकार अब अपने आख़िरी दिन गिन रही है।'
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि, जब कई देश न्यूक्लियर पॉवर प्लांट्स बंद कर रहे हैं, तो रीवा में प्लांट लगाने की सरकार की क्या मजबूरी है? क्या सरकार को क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और न्यूक्लियर प्रदूषण के संभावित खतरे की चिंता नहीं है?'
इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के संगठन महासचिव रवि तिवारी ने कहा कि, रोझौही और आसपास के गांवों के लोगों की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ये सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, जल संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि, परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर ग्रामीणों को स्पष्ट जानकारी देना और उनकी चिंताओं का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि, न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में आंदोलन को आसपास के अन्य गांवों तक भी पहुंचाया जाएगा। पार्टी का कहना है कि, स्थानीय लोगों की सहमति, किसानों के हितों और पर्यावरण से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलने तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
आंदोलन में पूर्व विधायक रामगरीब बनवासी, शीला त्यागी और विद्यावती पटेल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबिता साकेत, त्रिवेणी मैत्रे सहित कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। धरना-प्रदर्शन में चक्रधर सिंह, सिद्धनाथ पांडेय, वीरेंद्र पटेल, बलराम गौतम और अच्छेलाल साकेत सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।