छोटी-छोटी सावधानी बरतकर हम दीपावली को सुरक्षित तरीके से मना सकते हैं, आइए जानते हैं कैसे...
सागर. बीएमसी में दिवाली पर बर्न वार्ड व कैज्युल्टी में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं, नेत्र चिकित्सक भी ओपीडी में उपस्थित रहेंगे। पटाखों से झुलसने के मामले आने की आशंका को देखते हुए प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है। वर्न वार्ड व नेत्र विभाग में विशेषज्ञों की रात में ऑन कॉल ड्यूटी भी लगाई गई है। इसके अलावा जेआर व एसआर विभागों में रहेंगे।
आग से बचाव, क्या करें/क्या नहीं
1. कई लोग बालकनी की दीवार दीपक या मोमबत्ती रखते हैं, जिनके गिरने का खतरा रहता है। इससे बचें।
मोमबत्ती या दीया कपड़ों, परदों के आसपास कतई न रखें।
2. पटाखे खुली जगह पर चलाएं। आसपास नजर दौड़ाएं कि कोई ज्वलनशील पदार्थ (पेट्रोल-डीजल, कपड़ा, रुई, लकड़ी, भूसा आदि) तो नहीं।
3. विश्वसनीय दुकान से ही आतिशबाजी खरीदें। पटाखों पर लगा लेबल देखें, क्योंकि अक्सर पटाखे धोखा दे जाते हैं।
4. एक पटाखा जलाते समय बाकी पटाखे आसपास बिल्कुल न रखें। किसी अन्य के पटाखा चलाते समय आप
पटाखा चलाने से बचें।
5. पटाखे चलाने के लिए लंबी लकड़ी या फुलझड़ी का उपयोग बेहतर रहेगा, क्योंकि इससे पटाखे और हाथ में दूरी बनी रहेगी।
6. आतिशबाजी चलाने के लिए लाइटर जैसी वस्तु का इस्तेमाल न करें, यह खतरनाक साबित हो सकता है।
रॉकेट चलाते समय ध्यान रखें कि उसकी नोंक दरवाजे, खिडक़ी या खुली बिल्डिंग की ओर न हो। ऊपर पेड़ या बिजली का भी तार न हो।
7. पटाखे चलाते समय जूते या चप्पल जरूर पहनें। यह भी ध्यान रखें कि आपके शरीर पर लूज और सिंथेटिक कपड़े न हों। कॉटन के फिटिंग वाले कपड़े पहनना बेहतर रहेगा।
8. बिजली से जुड़ी किसी चीज में आग लगे तो उस पर पानी कतई न डालें।
9. आतिशबाजी चलाने के बाद घर आएं खासतौर पर बच्चे तो आंखों को ठंडे और साफ पानी से धोएं। ऐसा इसलिए वातावरण में हानिकारक गैसों के प्रभाव से आंखों में जलन हो सकती है। ज्यादा परेशानी हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
10. अगर आंख में कुछ गिर जाता है तो उसे रगड़ें नहीं, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
11. यदि आंख में हल्की सी भी चिंगारी लगती है तो आंख को मसलें नहीं। इससे घाव होने का खतरा रहेगा। आंख को सादे और साफ पानी से धोएं और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
12. पटाखों की तेज आवाज कानों को नुकसान पहुंचा सकती है, ऐसे में अगर आसपास ज्यादा शोर हो रहा हो तो कानों में कॉटन या ईयर प्लग लगा लें।
13. छोटे बच्चों का खास ध्यान रखें। कानों में दर्द महसूस हो रहा हो, तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।