मध्य प्रदेश में बनेगा प्रदेश का पहला चतुर्भुज फ्लाईओवर, 155 करोड़ के प्रोजेक्ट की डीपीआर को मंजूरी, 4 राष्ट्रीय राजमार्गों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत, कानपुर, नागपुर, झांसी मार्ग से जुड़ेगा, शहर भरेगा विकास की तेज उड़ान...
MP First Chaturbhuj Flyover: मध्य प्रदेश के सागर शहर के मकरोनिया चौराहे पर प्रस्तावित प्रदेश का पहला चतुर्भुज फ्लाईओवर कागजी प्रक्रिया से निकलकर आगे बढ़ गया है। केंद्र सरकार की सेतुबंध योजना के तहत प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर तैयार करने की स्वीकृति मिल गई है। करीब 155 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले इस अनूठे फ्लाईओवर की डीपीआर तैयार करने के लिए टेंडर प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी गई है।
बता दें कि ये केवल एक फ्लाईओवर नहीं है, बल्कि चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ ही क्षेत्रीय मार्गों को जोड़ने वाला संरचनात्मक ट्रैफिक समाधान माना जा रहा है।
मकरोनिया चौराहा एक ऐसा चौराहा है जिसे एक सामान्य चौराहा नहीं कहा जा सकता। यह चौराहा वह केंद्र बिंदु है जहां से कानपुर, जबलपुर, नागपुर, झांसी आपस में जुड़ते हैं। वहीं इन मार्गों के माध्यम से छतरपुर, रीवा, सिवनी, छिंदवाड़ा, ललितपु जैसे शहरों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसी चौराहे से होकर भारी वाहन, स्थानीय ट्रैफिक और हाईवे कनेक्टिविटी एक साथ गुजरती है। यही कारण है कि यहां लगातार जाम की स्थितियां बनती हैं।
कहां बनेगा चतुर्भुज फ्लाईओवर- मकरोनिया चौराहा, सागर
लंबाई- करीब 2.2 किमी
लागत (अनुमानित) - 155 करोड़ रुपए
कनेक्टिविटी- कानपुर, नागपुर, झांसी और सागर शहर
मकरोनिया से बहेरिया तक फोरलेन (करीब 15 करोड़ डीपीआर)
वर्तमान स्थिति- डीपीआर के लिए टेंडर स्वीकृत
2002 में भी इस फ्लाईओवर को सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। लेकिन स्थानीय व्यापारियों के विरोध के चलते निर्माण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब दोबारा प्रयास के बाद केवल घोषणा ही नहीं की गई, बल्कि डीपीआर प्रक्रिया शुरू करने को भी मंजूरी दे दी गई। जो किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का वास्तविक प्रारंभिक चरण माना जाता है।
यह प्रोजेक्ट केंद्र की सेतुबंध योजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग और जाम प्रभावित इलाकों में पुल और फ्लाईओवर बनाकर यातायात को सुगम करना है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी के मंत्रालय ने डीपीआर टेंडर को मंजूरी दी है।
मकरोनिया अब केवल उपनगर नहीं रह गया। यहां बड़े ऑटोमोबाइल, कमर्शियल आउटलेट्स, वेयरहाऊस, हाईवे ट्रांजिट मूवमेंट तेजी से बढ़े हैं। इसके साथ ही मार्ग नेशनल हाईवे 44 से भी जुड़ता है। जो आगे भोपाल, बीना और दक्षिण भारत की ओर कनेक्टिविटी देता है। यही कारण है कि यहां लोकल और इंटरसिटी ट्रैफिक का दबाव एक साथ बनता है और अक्सर ही जाम की स्थिति बनी रहती है।
मकरोनिया से बहेरिया तक वर्तमान में टू लेन सड़क है, भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह मार्ग अक्सर स्लो ट्रैफिक जोन बन जाता है। फोरलेन बनकर तैयार होगा, तो हाईवे मूवमेंट तेज होगा, शहर के अंदर का जाम कम होगा और भारी वाहनों का दबाव विभाजित होगा। इस तरह ये क्षेत्र ट्रैफिक जाम से मुक्त हो जाएगा।
नरयावली के विधायक प्रदीप लारिया का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए हैं। पहले विरोध के कारण रुकावट आई, लेकिन अब डीपीआर तैयार करने की मंजूरी मिल गई। ये डीपीआर अकेले चतुर्भुज फ्लाईओवर की नहीं है, बल्कि फोरलेन की भी है।
फिलहाल स्थिति यह है कि डीपीआर के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। फिर डीपीआर तैयार होगी। इशके बाद अंतिम स्वीकृति के लिए प्रशासनिक और वित्तीय विभाग का इंतजार करना होगा। इसके बाद ही निर्माण प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। यानी अभी निर्माँ शुरू नहीं हुआ है, लेकिन औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।
लोगों के मन में अब भी यही सवाल है कि क्या चतुर्भुज फ्लाईओवर बनने और फोरलेन सड़क होने से क्या जाम से मुक्ति मिल जाएगी? इस सवाल पर ट्रैफिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल फ्लाईओवर बनना ही काफी नहीं है, इसके साथ सर्विस रोड प्लानिंग, एंट्री एग्जिट मैनेजमेंट, लोकल मार्केट ट्रैफिक कंट्रोल और सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन पर भी काम होना चाहिए। ये सभी जरूरी पहलू हैं। ये ध्यान रखने वाली बातें ही इस फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को लंबे समय तक प्रभावी बनाएंगी। वरना जाम से मुक्ति आसान नहीं होगी।
बता दें कि मध्यप्रदेशमें पहली बार चार भुजाओं वाला यानी चतुर्भुजी फ्लाईओवर बनना प्रस्तावित किया गया है। वास्तव में ये संरचनात्मक बदलाव की ओर एक पहल है। लेकिन असली परीक्षा डीपीआर की गुणवत्ता की है और उसके बाद क्रियान्वयन में होगी। फिलहाल ये तय है कि सागर का मकरोनिया चौराहा अब राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण बिंदु बन चुका है।