MP News : रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट रिश्ते, प्रेम और खुशियों का त्योहार है। लेकिन, मध्य प्रदेश के सागर में रहने वाली दो बहनों पर इसी त्योहार से पूर्व दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस किसी ने भी इन बहनों की आपबीती सूनी उसकी आंखें नम हो गईं।
MP News :मध्य प्रदेश के सागर शहर के नरयावली नाका मुक्तिधाम में दो बहनों ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसे मुखाग्नि दी। ये नजारा जिस किसी ने भी देखा उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। दरअसल, रक्षाबंधन से एक दिन पहले अपने भाई को इन बहनों ने मुखाग्नि दी तो मानों जैसे श्मशान घाट भी इन बहनों के दर्द पर रो रहा था। सिसकियां लेते हुए दोनों बहने जब अपने भाई को अंतिम विदाई दे रही थीं तो इस अटूट प्रेम को देख वहां मौजूद हर कोई सिर्फ यही कह रहा था कि 'है भगवान…! क्या तू इस भाई को सिर्फ दो दिन को मोहलत और नहीं दे सकता था, ताकि इन बहनों का ये हाल तो न होता।'
दरअसल, शहर के रवि शंकर वार्ड में रहने वाले पप्पू भल्ला की दो बेटियां और एक बेटा है। 17 साल का बेटा राजू बचपन से ही मानसिक रूप से कमजोर था। इसलिए इतनी उम्र में सिर्फ उसका शरीर ही बढ़ा पर दिमाग अपने उम्र के बच्चों के समान नहीं था। इसी के चलते उसके हर काम सकी दोनों बहने ही किया करतीं। यानी सुबह से लेकर शाम तक के सारे काम और देखरेख दोनों बहनों की ही निगरानी में रहा करती। यही कारण है कि ये दोनों बहने अपने भाई से बेहद प्रेम किया करतीं।
इसी के चलते दोनों बहनें इस बार के रक्षाबंधन की तैयारियां दिनों पहले से कर रही थीं। वो अपने भाई की कलाई पर सजाने के लिए दो दिन पहले ही राखी खरीदकर लाईं थीं। यही नहीं, दोनों ने मिलकर रात उसी रात अपने घर पर ही अपने भाई के लिए मिठाई बनाई थी, लेकिन रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले इन बहनों की खुशियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इनके इकलौते भाई का अचानक निधन हो गया।
बहनों ने अपने अटूट प्रेम को दर्शाते हुए न सिर्फ हिंदू रीति रिवाज से होने वाले सभी संस्कारों को निभाया, बल्कि उसे मुखाग्नि देने से पहले भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उसे अंतिम विदाई दी। श्मशान में मौजूद जिस किसी ने भी ये भावुक दृश्य देखा वो बिना रोए रह नहीं सका।
इसके पहले जब रविशंकर वार्ड से अंतिम यात्रा निकली तो महक और माही दोनों कलश लेकर अर्थी के आगे-आगे चल रही थी। रास्ते में जिसने भी उन्हें देखा तो उसकी भी आंखें नम हो गईं। मुक्तिधाम पहुंचने से पहले होने वाले पिंडदान की रस्में भी बहनों ने ही अदा कीं। फिर मुक्तिधाम में पहुंचकर विधि विधान के साथ नम आंखों से उन्होंने अपने भाई को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी।