सहारनपुर में शिवालिक की पहाड़ियों पर बारिश और हथनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना नदी उफान पर है। यमुना में आए इस उफान से सरसावा-कलानौर रेल लाइन पर भी पानी भर गया। इससे रेलवे ट्रैक नीचे धंस गया और अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग पर 19 ट्रेनें प्रभावित हो गईं।
सहारनपुर में शिवालिक की पहाड़ियों पर लगातार बारिश और हथनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना नदी उफान पर आ गई है। यमुना में आए इस उफान से सरसावा-कलानौर रेल लाइन पर भी पानी भर गया। इससे रेलवे ट्रैक नीचे धंस गया और अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग पर 19 ट्रेनें प्रभावित हो गईं। इस कारण कई ट्रेनों को रद्द भी करना पड़ा है। वहीं कुछ ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया गया है। करीब 8 घंटे तक टीमों ने रेलवे ट्रैक को दुरुस्त किया। इसके बाद यातायात सामान्य हो सका है।
सरसावा-कलानौर रेल लाइन पर जलभराव के चलते रेलवे ट्रैक धंसने से हजारों रेलयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। बताया जा रहा है कि यमुना नदी में 2.97 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे यमुना उफान पर आ गई है। इससे सरसावा क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए। पानी के तेज बहाव से शाहजहांपुर रेलवे फाटक के पास मिट्टी का कटाव होने लगा और रेलवे ट्रैक के नीचे से पत्थर और मिट्टी पानी के साथ बह गए। इससे रेलवे ट्रैक नीचे धंस गया। गनीमत रही कि गेटमैन की सजगता से इस बात का समय रहते पता चल गया। आनन-फानन में अंबाला से सहारनपुर की ओर आने वाली ट्रेनों को रोक दिया गया।
घंटों बाद हो सका ट्रेनों का संचालन
सहारनपुर रेलवे स्टेशन अधीक्षक अनिल कुमार त्यागी ने बताया कि सरसावा से कलानौर के बीच शाहजहांपुर फाटक पर रेलवे ट्रैक धंस गया था। समय रहते इसकी सूचना मिलने के कारण ट्रेनों को रोक दिया गया और राहत टीमों को लगाकर ट्रैक को ठीक कराया गया। ट्रैक देर रात तक ठीक हो गया था और ट्रेनों का संचालन सामान्य कर दिया।
पटाखे लगाकर रोकी गई ट्रेन
सरसावा-कलानौर रेलवे स्टेशन के बीच फाटक पर ड्यूटी कर रहे गेटमैन कृष्ण कुमार की सजगता से सहारनपुर में बड़ा हादसा टल गया। कृष्ण कुमार ने बताया कि ट्रेन संख्या 1446 और ट्रेन संख्या 1461 बी के लिए रेलवे फाटक को बंद किया गया था। ट्रेन के गुजरने के बाद उन्होंने देखा कि ट्रैक के नीचे से मिट्टी नीचे बैठ गई है। कुछ दूर जाकर उन्होंने देखा कि रेलवे ट्रैक के नीचे से पूरी तरह मिट्टी निकल गई थी। इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। आनन-फानन में उन्होंने इसकी सूचना रेलवे के सीनियर अधिकारियों को दी और ट्रैक के दोनों और पटाखे लगाकर ट्रेनों को रोका। बता दें कि जब इमरजेंसी में ट्रेन को रोकना होता है तो रेलवे की ओर से ट्रैक पर पटाखे लगाए जाते हैं। इन पटाखों के फटने की आवाज सुनकर ट्रेन का पायलट ट्रेन को रोक देता है। इसी तकनीक का इस्तेमाल सहारनपुर में किया गया है।