हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़िया के पैर में मस्जिद के पास लगा कंकड़ इसी दौरान दाैड़कर आए मुस्लिम युवक ने संभाली कावड़ नहीं खंडित होने दिया जल साेशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें सभी कर रहे तारीफ
सहारनपुर। सहारनपुर के रहने एक मुस्लिम व्यक्ति ने कावड़िया की पवित्र गंगाजल gangajal से भरी कांवड़ को काे खंडित हाेने से बचाकर नजीर पेश की है। दरअसल कांवड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर जा रहे कावड़िया के पैर में कंकड़ लग गया। इस कंकड़ के लगने से कावड़ियां डगमगाने लगा और गिरने जैसी स्थिति में आ गया। इसी दाैरान दाैड़कर इमरान अंसारी ने कावड़ियां काे संभाल लिया और उसकी कांवड़ काे अपने अपने कंथे पर उठा लिया। इस तरह इमरान अंसारी ने हिंदू मुस्लिम साैहार्द की अनाेखी नजीर पेश की।
यह घटना सहारनपुर में माेहल्ला खान आलमपुरा की नई मस्जिद के पास की है। इमरान अंसारी यहां राेजाना की तरह कावड़ियाें की सेवा में लगे हुए थे। इसी दाैरान उन्हाेंने देखा कि एक कांवड़ियां के पैर में कंकड़ लगने से कावड़ियां डगमगाने लगा। यह देख माेहल्ला छिपियान के रहने वाले चाैधरी इमरान अंसारी दाैड़कर कावड़िया के पास पहुंचे और कावड़ियां काे गिरने से बचाते हुए पवित्र गंगाजल से भरी कावड़ को अपने कंधे पर उठा लिया। इसके बाद इमरान अंसारी के साथियाें ने कावड़ियां के पैर के पैर में लगी कंकड़ निकाली और प्राथमिक उपचार के बाद कावड़ियां काे फल खिलाए गए।
इस दाैरान इमरान अंसारी पूरे भाव के साथ कांवड़ काे अपने कंधे पर ही लिए खड़े रहे। मुस्लिम व्यक्ति काे अपने कांधे पर कांवड़ उठाए देखा ताे इस क्षण काे लाेगाें ने अपने माेबाइल फाेन के कैमरे में कैद कर लिया। यह तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। हिंदू मुस्लिम एकता की इस नजीर को सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ मिल रही है और लोग यही कह रहे हैं कि Shivratri पर हिंदू मुस्लिम एकता का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता।
गंगाजल से भरी कावड़ को नहीं रखते नीचे
देवभूमि हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़िया जल चढ़ाने तक कावड़ Kanwar को जमीन पर नहीं रखते। ऐसी मान्यता है कि अगर कावड़ को जमीन पर रख दिया जाए तो वह खंडित हो जाती है और यही कारण है कि जिस कावड़िया के पैर में कंकर लगी थी वह कांवड़ काे नीचे नहीं रखते। ऐसे में उसे बेहद कष्ट उठाना पड़ रहा था और कावड़ियां के लिए संभलना भी मुश्किल हाे रहा था। इमरान अंसारी ने कावड़िया की मदद की और जब तक कावड़िए के पैर को आराम नहीं हो गया तब तक इस कांवड़ काे वह अपने कंधे पर ही रखकर खड़े रहे।