
Saharanpur Mosque Demolition: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के करीब 24 घंटे बाद उस जगह पर एक कुआं मिलने से मामला चर्चा में आ गया है। रविवार सुबह मलबा हटाने के दौरान टीम को करीब 15 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा कुआं दिखाई दिया। इसके ऊपर भारी स्लैब पड़ा था, जिसे पोकलेन से नहीं तोड़ा जा सका। इसके बाद कटर की मदद से स्लैब हटाया गया। प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद कुएं के ऊपर बनी थी। हालांकि, कुआं कब और किसने बनवाया, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कुएं के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसे कब बनाया गया था और इसका इस्तेमाल किस काम के लिए होता था। प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद का निर्माण इसी कुएं के ऊपर किया गया था। सहारनपुर सदर एसडीएम सुबोध कुमार ने बताया कि मस्जिद कुएं के ऊपर बनी थी। हालांकि कुआं किसने और कब बनवाया, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। एसडीएम ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।
रविवार सुबह जब मस्जिद का मलबा हटाया जा रहा था, तभी टीम को जमीन के नीचे स्लैब नजर आया। पोकलेन मशीन से इसे हटाने की कोशिश की गई, लेकिन स्लैब नहीं टूटा। इसके बाद कटर से स्लैब काटकर हटाया गया। स्लैब हटते ही उसके नीचे कुआं दिखाई दिया। कुएं की गहराई करीब 15 फीट बताई गई है, जबकि इसकी चौड़ाई लगभग डेढ़ मीटर है। फिलहाल प्रशासन ने इसे सुरक्षित रखने के लिए कवर कर दिया है।
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी दो मंजिला मस्जिद को शनिवार सुबह पुलिस-प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कराया था। दो सितंबर को जिला न्यायालय के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई थी। इसके लिए सात बुलडोजर लगाए गए थे। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई के आदेश में मस्जिद के निर्माण को अवैध माना था।
मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर कब्जा कर मस्जिद बनाई गई है। जांच के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम-1972 के तहत वाद दाखिल किया गया। सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा था कि प्रदेश सरकार की 315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा करके मस्जिद का निर्माण किया गया है।
कोर्ट ने फसली साल 1324 और 1359 में संबंधित जमीन को कचहरी-कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज पाया। इसके बाद मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए बेदखली और कब्जाधारी से 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया गया। मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला जज न्यायालय में अपील दाखिल की थी। करीब डेढ़ महीने तक दोनों पक्षों की सुनवाई चली। दो सितंबर को जिला जज ने अपील खारिज कर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।