सहारनपुर

स्त्री : देह से आगे : स्त्री को देह नहीं, संपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में देखने की जरूरत

सहारनपुर के रामतीर्थ केंद्र में 'स्त्री : देह से आगे' विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि स्त्री को केवल देह या पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित करना अन्याय है। उन्होंने महिलाओं के स्वावलंबन, स्वतंत्रता और विचारों के सम्मान पर जोर दिया।
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Stree Deh Se Aage Event
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी। फोटो पत्रिका

सहारनपुर। अंबाला रोड स्थित रामतीर्थ केंद्र एवं वराह मिहिर ज्योतिर्विविज्ञान अनुसंधान संस्थान में बुधवार शाम सहारनपुर की महिलाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। शाम पांच बजे शुरू हुए कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संस्थान के अध्यक्ष सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर ने तुलसी का पौधा भेंट कर मुख्य वक्ता गुलाब कोठारी का स्वागत किया।

ओपन माइक सत्र बना मुख्य आकर्षण

खचाखच भरे सभागार में आयोजित ओपन माइक सत्र कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। सहारनपुर के विभिन्न वर्गों और धर्मों से जुड़ी महिलाओं ने बेझिझक अपने अनुभव साझा किए और सामाजिक, व्यक्तिगत तथा पारिवारिक मुद्दों से जुड़े सवाल उठाए। चिकित्सकों, शिक्षिकाओं, गृहिणियों और समाजसेविकाओं की भागीदारी ने संवाद को विविधता और व्यापकता प्रदान की।

स्त्री : देह से आगे विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम

स्त्री को देह तक सीमित करना अन्याय

‘स्त्री : देह से आगे’ विषय पर गुलाब कोठारी ने कहा कि स्त्री को केवल उसकी देह, भूमिका या सामाजिक पहचान तक सीमित करके देखना उसके व्यक्तित्व के साथ अन्याय है। स्त्री संवेदना, सृजन, विचार और निर्णय की स्वतंत्र शक्ति रखती है। वह परिवार और समाज को दिशा देने वाली चेतना है। इसलिए उसके अस्तित्व को केवल बाहरी रूप या पारंपरिक भूमिकाओं के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता।

स्त्री : देह से आगे विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम

स्वतंत्रता का सही अर्थ

उन्होंने कहा कि स्त्री की स्वतंत्रता का अर्थ परिवार और समाज से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि अपने निर्णयों, इच्छाओं और क्षमताओं को सम्मान के साथ स्वीकार करना है। जब स्त्री स्वयं को पहचानती है, तभी वह अपने जीवन और आसपास की दुनिया में सार्थक बदलाव ला सकती है।

महिलाओं से संवाद और स्वावलंबन का आग्रह

कोठारी ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे अपनी बात कहने में संकोच न करें और सवालों को दबाने के बजाय संवाद का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, शिक्षा और आर्थिक-सामाजिक स्वावलंबन महिलाओं को मजबूत बनाते हैं। समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है, जब महिलाओं को सुनने, समझने और निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का स्थान देने की संस्कृति विकसित हो।

सम्मान का वास्तविक अर्थ और समानता की नींव

उन्होंने कहा कि स्त्री को सम्मान देने का अर्थ केवल उसकी प्रशंसा करना नहीं, बल्कि उसके अधिकारों, विचारों और असहमति को भी स्वीकार करना है। स्त्री को देह से आगे एक संपूर्ण मनुष्य के रूप में देखने की दृष्टि ही समानता और गरिमा पर आधारित समाज की नींव रख सकती है। कार्यक्रम का संचालन शिवमणि त्यागी ने किया।

Updated on:
23 Sept 2026 10:02 pm
Published on:
23 Sept 2026 10:02 pm