Judge Transfer Sambhal: संभल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई हिंसा या कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अचानक सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर सुल्तानपुर भेज दिया गया। यह फैसला ऐसे समय आया […]
Judge Transfer Sambhal: संभल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई हिंसा या कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अचानक सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर सुल्तानपुर भेज दिया गया।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उन्होंने 9 जनवरी को संभल के तत्कालीन CO रहे ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसी आदेश के बाद से यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जज के तबादले की खबर मिलते ही संभल के वकीलों में आक्रोश फैल गया। जिला न्यायालय परिसर से लेकर सड़कों तक नारेबाजी हुई और सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया। वकीलों ने इस तबादले को “न्याय की हत्या” करार दिया। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि विभांशु सुधीर ने अपने फैसले से न्याय व्यवस्था में भरोसा मजबूत किया है और ऐसे जज का स्थानांतरण गलत संदेश देता है।
विभांशु सुधीर की 13 साल की न्यायिक सेवा में 16 बार तबादले हो चुके हैं, जो अपने आप में असाधारण माना जा रहा है। इसी आंकड़े को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनका तबादला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर इसे ASP अनुज चौधरी के खिलाफ दिए गए आदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। यह चर्चा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सत्य स्थानांतरित नहीं होता है।” इस बयान के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेने लगा। समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छिड़ गई कि न्यायपालिका के फैसलों पर प्रशासनिक कदमों का कितना असर पड़ता है।
पूरा मामला 9 जनवरी के उस आदेश से जुड़ा है, जब CJM विभांशु सुधीर ने संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने के मामले में ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था। इस फैसले के बाद पुलिस प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल उठे थे। अब जज के तबादले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।