UP Politics: दलित नेता उमेशचंद्र दिवाकर ने 200 समर्थकों के साथ पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी जॉइन की। उन्होंने चंदौसी के विकास न होने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए और 2027 में सत्ता परिवर्तन का संकल्प लिया।
BJP Leader Joins SP Sambhal: संभल जनपद की राजनीति में सोमवार शाम बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के दलित नेता उमेशचंद्र दिवाकर ने लगभग 200 कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा की सदस्यता छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम से न सिर्फ भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, बल्कि आगामी चुनावी रणनीतियों पर भी असर पड़ता नजर आ रहा है। जिले में दलित समाज से जुड़े एक बड़े चेहरे का सपा में जाना, राजनीतिक संतुलन को बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
यह सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम संभल जनपद के बहजोई कस्बा क्षेत्र में सोमवार शाम करीब 5 बजे आयोजित किया गया, जहां सपा के जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी और राज्यसभा सांसद जावेद अली खान की मौजूदगी में उमेशचंद्र दिवाकर ने औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता ली। कार्यक्रम में भारी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि दिवाकर के साथ एक संगठित राजनीतिक आधार भी सपा में शिफ्ट हुआ है। सपा नेताओं ने इसे भाजपा के अंदर बढ़ते असंतोष का परिणाम बताया।
मंच से बोलते हुए उमेशचंद्र दिवाकर ने प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी पर चंदौसी क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मंत्री रहते हुए क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ, बल्कि जनता की जरूरतों की अनदेखी की गई। दिवाकर ने दावा किया कि अगर इच्छाशक्ति होती तो चंदौसी में आज कई डिग्री कॉलेज, बेहतर सड़कें और शिक्षा के बड़े केंद्र होते, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
दिवाकर ने चंदौसी की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों में शहर की तस्वीर लगभग जस की तस बनी हुई है। उन्होंने आसपास के क्षेत्रों से तुलना करते हुए कहा कि जहां अन्य कस्बों और शहरों में विकास के काम नजर आते हैं, वहीं चंदौसी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी और मंत्री के हाथ में यह जिम्मेदारी होती तो चंदौसी का नक्शा कब का बदल चुका होता।
भाजपा सरकार के दावों पर निशाना साधते हुए दिवाकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘2022 तक हर सर को छत’ जैसे नारों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर आज भी हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके पास पक्का आवास नहीं है। दिवाकर ने आरोप लगाया कि जनता से किए गए कई वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गए और वास्तविकता में गरीबों, मजदूरों और दलितों की समस्याएं जस की तस बनी रहीं।
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के कारण बताते हुए दिवाकर ने कहा कि सपा की राजनीति विकास पर आधारित है, न कि धर्म और जाति पर। उन्होंने दावा किया कि भाजपा में रहते हुए उन्हें कथनी और करनी का फर्क महसूस हुआ, जिसे समझने में उन्हें देर हो गई। दिवाकर ने मंच से कहा कि अब वे समाजवादी विचारधारा के साथ खड़े होकर जनता के असली मुद्दों रोजगार, शिक्षा और विकास को प्राथमिकता देंगे।
सपा की सदस्यता लेते हुए दिवाकर ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वे अपने समर्थकों के साथ मिलकर जिले में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। मंच से दिए गए उनके इस बयान को आगामी चुनावी माहौल का संकेत माना जा रहा है। सपा नेताओं ने भी दिवाकर के जुड़ने को संगठन के लिए मजबूती का बड़ा कदम बताया।
गौरतलब है कि इससे पहले 2 फरवरी को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की मौजूदगी में भाजपा की जिला मंत्री प्रो. मीनाक्षी सागर ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। उन्होंने भाजपा पर संविधान विरोधी, मजदूर विरोधी और गरीब विरोधी नीतियों का आरोप लगाया था। महज 15 दिनों के भीतर दो दलित नेताओं का भाजपा से अलग होना संभल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है और इसे भाजपा के लिए गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।