सम्भल

संभल में अवैध कब्जों पर सबसे बड़ी कार्रवाई: 200 बीघा झील की जमीन खाली, मजार भी तोड़ी गई

Sambhal News: संभल में प्रशासन ने 200 बीघा झील की सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाते हुए 80 बीघा कृषि भूमि को कब्जामुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बनी शेर अली बाबा पीर मजार पर भी बुलडोजर चलाया गया।
2 min read
May 23, 2026
sambhal lake land encroachment action
संभल में अवैध कब्जों पर सबसे बड़ी कार्रवाई

Land Encroachment Action: संभल जिले के सिरसी-बिलारी रोड स्थित 200 बीघा झील की सरकारी भूमि पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध कब्जों को पूरी तरह हटवा दिया। तहसील प्रशासन की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर न केवल कृषि कब्जों को समाप्त किया गया, बल्कि 22 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी शेर अली बाबा पीर मजार को भी ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई न्यायालय से जारी बेदखली आदेश के बाद अमल में लाई गई।

दो घंटे तक चला बुलडोजर अभियान

शनिवार दोपहर करीब 4 बजे शुरू हुई कार्रवाई शाम 6:30 बजे तक लगातार जारी रही। तहसील संभल के हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत सिरसी में भारी पुलिस और राजस्व टीम की मौजूदगी के बीच अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए थे, जिससे क्षेत्र में हलचल का माहौल बना रहा।

नक्शे और पैमाइश के आधार पर हुई कार्रवाई

राजस्व विभाग की टीम ने सरकारी अभिलेखों और नक्शों के आधार पर भूमि की पैमाइश की। जांच में सामने आया कि 200 बीघा कसा झील की लगभग 80 बीघा भूमि पर आसपास के किसानों ने कृषि कब्जा कर रखा था। प्रशासन ने पहले ही उस भूमि को खाली करा लिया था। वहीं, झील की भूमि पर पक्का निर्माण कर बनाई गई मजार को भी अवैध घोषित करते हुए बुलडोजर से हटाया गया।

तहसीलदार ने बताई पूरी कानूनी प्रक्रिया

तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि झील की जमीन सरकारी अभिलेखों में दर्ज है और उस पर किसी भी प्रकार का निजी कब्जा मान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने खेती के जरिए कब्जा करने की कोशिश की थी, जबकि एक छोटी मजार बनाकर भी जमीन पर अधिकार जताने का प्रयास किया गया। प्रशासन ने बिना किसी विरोध के किसानों से भूमि खाली करा ली थी।

धारा 67 के तहत दर्ज हुआ था मुकदमा

प्रशासन के अनुसार मजार के संबंध में धारा 67 के तहत न्यायालय में मामला दर्ज किया गया था। मजार के मुतवल्ली की मृत्यु के बाद किसी भी व्यक्ति ने अदालत में कोई आपत्ति दाखिल नहीं की। इसके बाद प्रशासन ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए बेदखली आदेश प्राप्त किया और उसी आदेश के तहत मौके पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

स्थानीय लोगों ने दी अपनी प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी ने बताया कि यह मजार दादा कच्छी अलिफ शाह के नाम से जानी जाती थी और उन्होंने बचपन से यहां मजार ही देखी है। उन्होंने कहा कि जुमेरात के दिन यहां लोग आते थे, लेकिन कोई बड़ा मेला या आयोजन नहीं होता था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि जमीन सरकार की है तो प्रशासन अपनी भूमि वापस ले रहा है।

Updated on:
23 May 2026 08:10 pm
Published on:
23 May 2026 08:09 pm