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संभल में मस्जिद, दरगाह और मकान पर प्रशासन का एक्शन, सरकारी जमीन घोषित होते ही बुलडोजर की तैयारी तेज

Sambhal News: संभल के सैफखां सराय गांव में मस्जिद, दरगाह और मकान सरकारी जमीन पर बने होने का मामला सामने आया है। तहसीलदार न्यायालय ने गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर भूमि को सरकारी घोषित करते हुए कब्जा हटाने का आदेश दिया है।
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Mar 09, 2026
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संभल में मस्जिद, दरगाह और मकान पर प्रशासन का एक्शन..

Mosque dargah illegal land case Sambhal: संभल जिले में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। चंदौसी मार्ग स्थित सैफखां सराय गांव में मस्जिद, दरगाह और एक मकान के निर्माण को प्रशासन ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। तहसीलदार न्यायालय के फैसले के बाद अब प्रशासन द्वारा जमीन को कब्जा मुक्त कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिससे इलाके में हलचल बढ़ गई है।

सरकारी जमीन पर निर्माण मिलने का दावा

प्रशासनिक जांच के दौरान यह पाया गया कि गांव सैफखां सराय में गाटा संख्या 452 की करीब 0.1340 हेक्टेयर जमीन पर मस्जिद, दरगाह और एक मकान का निर्माण किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी दर्ज है, इसलिए इस पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार न्यायालय ने इस जमीन को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा हटाने का आदेश दे दिया है।

जामा मस्जिद के इमाम का परिवार रह रहा मकान में

बताया जा रहा है कि इस परिसर में बने मकान में संभल शहर की जामा मस्जिद के इमाम और उनके भाई का परिवार निवास करता है। मस्जिद और दरगाह की देखरेख की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास है। स्थानीय स्तर पर यह स्थान लंबे समय से धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता रहा है, जहां आसपास के लोग भी आते-जाते रहे हैं।

इमाम का दावा - पुश्तैनी जमीन पर बना है धार्मिक स्थल

दूसरी ओर जामा मस्जिद के इमाम का कहना है कि जिस जमीन पर दरगाह और मस्जिद बनी है, वह उनके परिवार की पुश्तैनी जमीन है। उनका दावा है कि यहां पहले से ही एक दरगाह मौजूद थी और बाद में उनके पिता की मजार भी यहीं बनाई गई। इमाम के मुताबिक मस्जिद का निर्माण भी कई साल पहले कराया गया था और यह स्थान वर्षों से धार्मिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।

2016-2017 में भी उठ चुका था विवाद

इस जमीन को लेकर विवाद नया नहीं है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2016 और 2017 में कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया था कि यह जमीन सरकारी है और उस पर अवैध निर्माण किया गया है। मामला आगे बढ़ते हुए हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था, हालांकि उस समय अंतिम कार्रवाई स्पष्ट नहीं हो पाई थी और मामला लंबित ही रहा।

तहसीलदार न्यायालय में शिकायत पर हुआ फैसला

बाद में इस मामले में एक अलग शिकायत तहसीलदार न्यायालय में भी दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्टों को आधार बनाकर अदालत ने फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया कि संबंधित जमीन सरकारी है और उस पर बने निर्माण को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाए।

प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी सबकी नजर

तहसीलदार न्यायालय के आदेश के बाद अब प्रशासन की आगे की कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आदेश के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। वहीं इलाके में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और आगे होने वाली कार्रवाई को लेकर स्थिति पर सभी की निगाह बनी हुई है।

Updated on:
09 Mar 2026 08:15 pm
Published on:
09 Mar 2026 08:15 pm