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संभल की राजनीति में उबाल: पिता के चुनावी ऐलान पर सांसद जियाउर्रहमान बर्क का बड़ा बयान, टिकट पर सस्पेंस कायम

Sambhal Politics: संभल विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पिता ममलूकुर्रहमान बर्क के चुनाव लड़ने के ऐलान पर सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि टिकट मांगना सबका अधिकार है।

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Feb 18, 2026
संभल की राजनीति में उबाल | Image - FB/@barq_zia

Zia Ur Rehman Barq Sambhal: संभल विधानसभा क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क द्वारा विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब सांसद ने भी खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि टिकट के लिए दावेदारी करना हर कार्यकर्ता का लोकतांत्रिक अधिकार है और इसमें कोई बुराई नहीं है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।

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टिकट का अधिकार सबका

सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके पिता द्वारा विधानसभा टिकट मांगने की जानकारी उन्हें पहले से थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी में कई नेता टिकट के दावेदार हैं और यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। सांसद ने यह भरोसा दिलाया कि पार्टी जिसे भी उम्मीदवार घोषित करेगी, वे उसके पक्ष में पूरी मजबूती से प्रचार करेंगे और पार्टी निर्णय का सम्मान करेंगे।

सुहैल इकबाल की दावेदारी पर संतुलित प्रतिक्रिया

सदर विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल की संभावित दावेदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि टिकट किसे मिलेगा, यह पूरी तरह पार्टी नेतृत्व तय करेगा। कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी माना कि संभल में कई नेता टिकट की दौड़ में हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

वायरल वीडियो से बदला सियासी माहौल

गौरतलब है कि तीन फरवरी को ममलूकुर्रहमान बर्क का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने संभल सदर विधानसभा से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। वीडियो में उन्होंने कहा था कि वे समाजवादी पार्टी से ही टिकट लेंगे और जनता का समर्थन उनके साथ है। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और समर्थकों में उत्साह देखा गया।

असली फैसला वक्त और जनता करती है

ममलूकुर्रहमान बर्क ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा था कि टिकट की दावेदारी कोई भी कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के भरोसे और समय की कसौटी पर तय होता है। उन्होंने यह दावा किया कि जो नेता जनता की आवाज मजबूती से उठाएगा, वही सच्चा प्रतिनिधि कहलाएगा। उनके इस बयान को सीधे तौर पर आंतरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है।

दशकों पुरानी बर्क-इकबाल प्रतिद्वंद्विता

संभल की राजनीति में बर्क और इकबाल परिवारों की प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है। दोनों परिवार दशकों से एक ही पार्टी में रहते हुए भी एक-दूसरे के विरोधी माने जाते रहे हैं। पहले विधायक इकबाल महमूद और सांसद के दादा डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के बीच राजनीतिक खींचतान जगजाहिर रही है। समय-समय पर यह टकराव खुलकर सामने आता रहा है।

निकाय चुनाव में दिखी थी खुली बगावत

2023 के निकाय चुनाव में जब संभल नगर पालिका से विधायक की पत्नी सपा प्रत्याशी बनीं, तब तत्कालीन सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने निर्दलीय उम्मीदवार उतारकर सियासी समीकरणों को उलझा दिया था। हालांकि, उस चुनाव में दोनों पक्षों को हार का सामना करना पड़ा। इस घटना ने दोनों परिवारों के बीच दूरी और बढ़ा दी थी।

निधन के बाद दिखी थी अस्थायी एकजुटता

2024 में डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ विधायक इकबाल महमूद उनके आवास पहुंचे थे। इस घटनाक्रम के बाद दोनों परिवारों के बीच रिश्तों में नरमी की चर्चा शुरू हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि अब दोनों परिवार आपसी मतभेद भुलाकर साथ चलेंगे।

हिंसा मामले के बाद फिर आमने-सामने

24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में हुई हिंसा ने दोनों परिवारों को फिर आमने-सामने खड़ा कर दिया। इस मामले में सांसद और विधायक दोनों के नाम सामने आए। पुलिस जांच में विधायक के बेटे को क्लीन चिट मिल गई, जबकि सांसद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। इसके बाद राजनीतिक रिश्तों में दोबारा तल्खी आ गई।

टिकट की जंग से बढ़ेगा सियासी तनाव

पिता ममलूकुर्रहमान बर्क के चुनावी ऐलान के बाद सदर विधायक इकबाल महमूद ने सांसद से इस पूरे मुद्दे पर राय मांगी थी। अब सांसद के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि संभल विधानसभा सीट को लेकर आगामी दिनों में सियासी संघर्ष और तेज होगा। टिकट किसे मिलेगा, यह तो पार्टी नेतृत्व तय करेगा, लेकिन इस जंग ने संभल की राजनीति को नई गर्मी दे दी है।

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