About Former BSP MLA Tabish Khan: बसपा के पूर्व बसपा विधायक ताबिश खान को 3 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जानिए पूरा मामला क्या है?
About Former BSP MLA Tabish Khan:उत्तर प्रदेश केसंतकबीरनगर जिले की अदालत ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक मोहम्मद ताबिश खान और उनके भाई इफ्तेखार को एक गंभीर मामले में दोषी ठहराते हुए 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) एवं विशेष न्यायाधीश MP-MLAचेतना त्यागी की अदालत ने सुनाया। दोनों आरोपियों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, तोड़फोड़, अपशब्द कहने, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप सिद्ध हुए।
अदालत ने दोनों दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि वे यह जुर्माना अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें एक माह की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
यह मामला 26 जनवरी 2016 की दोपहर का है। उस समय थाना धर्मसिंहवा में तैनात कांस्टेबल कमाल अहमद खान ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, पूर्व विधायक ताबिश खान अपने भाई इफ्तेखार और 20-25 समर्थकों के साथ थाने पहुंचे थे।
आरोप है कि थाने पहुंचते ही ताबिश खान और उनके समर्थकों ने ड्यूटी पर मौजूद सिपाही के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। सिपाही के विरोध करने पर ताबिश खान ने उसकी कॉलर पकड़ ली और समर्थकों को उसे पीटने के लिए उकसाया। इसके बाद समर्थकों ने सिपाही के साथ मारपीट की और उसकी वर्दी भी फाड़ दी।
घटना के दौरान जब थाने की अन्य पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची, तो आरोपी और उनके समर्थक वहां से भाग निकले। जाते समय उन्होंने सिपाही को जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद थाना धर्मसिंहवा में मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और मुकदमे की मांग की। अदालत ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें दोषी करार दिया।
मोहम्मद ताबिश खान का राजनीतिक सफर भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2007 में उन्होंने बसपा के टिकट पर खेसरहा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। हालांकि, परिसीमन के बाद यह सीट समाप्त हो गई। इसके बाद 2012 में उन्हें मेंहदावल सीट से टिकट नहीं मिला। 2017 में उन्होंने AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। वहीं, 2022 में उन्होंने फिर से बसपा के टिकट पर मेंहदावल से चुनाव लड़ा, जिसमें वह तीसरे स्थान पर रहे।