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बंदरों पर मौत का संकट! सरकार ने बनाई हमलों पर रोक लगाने के लिए अंतरिम कार्ययोजना

Monkeys In Danger Of Death: बंदरों के बढ़ते हमलों पर रोक लगाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सीमित अवधि के लिए उन्हें मारने की अनुमति दे दी गई है। जानिए पूरा मामला क्या है?
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लखनऊ

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Harshul Mehra

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Updated: 18 Apr 2026, 11:09 AM IST

crackdown on increasing monkey attacks killing permitted for limited period in affected areas

बंदरों पर मौत का संकट! फोटो सोर्स-Ai

Monkeys In Danger Of Death: लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रदेश सरकार ने बंदरों के बढ़ते हमलों और मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। यह योजना इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर 17 फरवरी को दिए गए आदेश के अनुपालन में बनाई गई है। सरकार ने इस योजना में तात्कालिक, निरोधात्मक और दीर्घकालीन—तीनों स्तरों पर उपाय शामिल किए हैं, जिससे समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

दीर्घकालीन उपाय: तकनीक से नियंत्रित होगी संख्या

दीर्घकालीन रणनीति के तहत बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। साथ ही, जिन बंदरों को पकड़ा जाएगा, उन्हें विशेष परिस्थितियों में रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा। इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में बंदरों का अत्यधिक आतंक है, वहां सीमित अवधि के लिए उन्हें मारने की अनुमति देने का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि यह अनुमति सख्त नियमों और निगरानी के तहत ही लागू होगी।

तात्कालिक कदम: एक महीने में सर्वे और हेल्पलाइन अनिवार्य

सरकार ने तात्कालिक उपायों के तहत सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे एक महीने के भीतर बंदरों से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करें। साथ ही, इन क्षेत्रों में बंदरों की संख्या का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर जारी कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम लोग आसानी से शिकायत दर्ज करा सकें।

प्रशिक्षित लोगों को ही पकड़ने की अनुमति

स्थानीय निकायों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बंदरों को पकड़ने में दक्ष व्यक्तियों और संस्थाओं का पंजीकरण करें। केवल प्रशिक्षित और अधिकृत लोग ही बंदरों को पकड़ सकेंगे। आम नागरिकों को ऐसा करने की अनुमति नहीं होगी।

सख्त चेतावनी: आम आदमी नहीं मार सकता बंदर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी आम व्यक्ति बंदरों को मारने का प्रयास नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और अनियंत्रित हिंसा को रोका जा सके।

भोजन के लिए तय होंगे विशेष स्थान

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए बंदरों को भोजन कराने के लिए विशेष स्थान निर्धारित किए जाएंगे। नगर निकाय ऐसे स्थान चिन्हित करेंगे जहां लोग सुरक्षित तरीके से बंदरों को भोजन करा सकें। इसके अलावा, फलों के पौधों का रोपण भी किया जाएगा, जिससे बंदरों के प्राकृतिक भोजन स्रोत बढ़ सकें।

जिलास्तरीय समिति करेगी निगरानी

मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति में वन विभाग, पुलिस, पशुपालन विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति सभी उपायों के क्रियान्वयन और प्रभाव की निगरानी करेगी।

हिमाचल प्रदेश में भी लागू हो चुका है ऐसा कदम

इस तरह का कदम पहले हिमाचल प्रदेश में भी उठाया जा चुका है। वर्ष 2020 में वहां करीब 91 तहसीलों में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए सरकार ने एक साल के लिए उन्हें मारने की अनुमति दी थी। यह निर्णय फसलों को हो रहे नुकसान और मानव जीवन पर खतरे को देखते हुए लिया गया था।