रियल एस्टेट में बिल्डरों की मनमानी पर लगी लगाम
सतना। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी एक्ट (रेरा) में रजिस्ट्रेशन कराने से बच रहे बिल्डरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे बिल्डरों की प्रॉपर्टी की तब तक रजिस्ट्री नहीं होगी जब तक वे रजिस्ट्रेशन नहीं करा लेंगे। अगर प्रॉपर्टी बेचकर धोखे से रजिस्ट्री करा भी लेते हैं तो उन्हें प्रॉपर्टी की कीमत का कम से कम 10 प्रतिशत जुर्माना भरना होगा। जिले में 150 से अधिक छोटे-बड़े बिल्डर हैं।
लेकिन, रेरा अथॉरिटी द्वारा जारी की गई सूची में अभी तक 12 प्रोजेक्ट का ही रजिस्ट्रेशन कराया गया है। इसमें भी आधे से ज्यादा शासकीय व हाउसिंग बोर्ड के प्रोजेक्ट हैं। जिनके खिलाफ रेरा अथॉरिटी के पास शिकायत दर्ज की गई है प्रकरणों में सुनवाई जनवरी के पहले गुरुवार को होगी।
बिना पंजीयन अवैध होंगे
1 मई 2016 से प्रदेशभर में रेरा एक्ट प्रभावी हो चुका है। इसके अनुसार सभी प्रचलित और नई आवासीय कॉलोनी के प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीयन कराना बिल्डर्स को अनिवार्य हो गया है। रेरा में पंजीयन नहीं कराने वाले कॉलोनी, प्रोजेक्ट अवैध की श्रेणी में आएंगे। उनके खिलाफ जुर्माना सहित कार्रवाई हो सकती है।
इन तहसीलों में कोई पंजीयन नहीं
जिले के पांच तहसीलें ऐसी भी हैं जहां एक भी प्रोजेक्ट रेरा के तहत पंजीकृत नहीं हैं। इसमें रामपुर बाघेलान, अमरपाटन, बिरसिंहपुर, कोटर, मझगवां व नागौद आदि शामिल हैं।
लेनी होगी गारंटी
आवंटियों से जो अनुबंध ठेकेदार, बिल्डर्स व प्रमोटर्स करेंगे उसका पालन उन्हें करना होगा। साथ ही अपने निर्माण कार्य की 5 वर्ष की गारंटी भी लेनी होगी। उन्हें समय पर आवंटितों को डिलीवरी देनी होगी। विज्ञापन और ब्रोशर में जो-जो दावे किए जाएंगे उनकी पूर्ति बिल्डर्स को करनी होगी।
रजिस्ट्रेशन है या नहीं ऐसे देख सकते हैं
- रेरा की वेबसाइट को ओपन करें। आपको स्क्रीन पर ऊपर की ओर प्रोजेक्ट लिखा नजर आएगा। जिस बिल्डर से आप प्रापर्टी खरीदने वाले हैं उसकी जानकारी दर्ज है या नहीं, यहां पता चल जाएगी।
- बिल्डर की जानकारी दर्ज है तो प्रोजेक्ट में प्रॉपर्टी की कीमत से लेकर नगर एवं ग्राम निवेश की अनुमति, नगर निगम प्रशासन की अनुमति, डायवर्सन, नामांतरण, सीमांकन, खसरे में किसका नाम है आदि की जानकारी मिल जाएगी।
- यह प्रोजेक्ट कब शुरू हुआ या किया जाएगा, प्रापर्टी खरीदने के बाद आपको कब तक उसका मालिकाना हक मिलेगा, बिल्डर का वास्तविक पता, प्रोजेक्ट में उसके कितने पार्टनर हैं सभी जानकारियां मिल जाएंगी। इससे राहत होगी।
ये प्रोजेक्ट पंजीकृत
- उचेहरा-अटल अक्षय योजना के तहत 192 एलआईजी व 187 ईडब्लूएस व 9 दुकान
- मैहर-ग्रीन सिटी हाउसिंग
- रघुराज नगर-लोटस सिटी टॉउनशिप
- हाउसिंग बोर्ड के बांधवगढ़ में 12 फ्लैट्स
- कृष्णम एवन्यू
- गार्डेन व्यू
- केपटाउन हाइट
- कृपालपुर में हाउसिंग बोर्ड के 5 एचआईजी, 10 एमआईजी
- कृपालपुर बसंत विहार में हाउसिंग बोर्ड के 106 एमआईजी
- हाउसिंग बोर्ड के 10 एचआईजी सुपर डीलक्स, 10 एचआईजी सीनियर ड्यूप्लेक्स, 6 एचआईजी जूनियर ड्यूप्लेक्स, 78 एचआईजी सीनियर
- अटल आश्रय योजना के तहत 48 एलआईजी, 33 ईडब्लूएस, 7 दुकान
- मैत्री उन्नति पार्क