
सतना. महिला बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायिका और मिनी कार्यकर्ताओं की जो नियुक्ति दो माह में हो जानी चाहिए थी वे 9 माह गुजरने के बाद भी नहीं हो सकी हैं। रीवा संभाग में ऐसी कुल 70 भर्तियां हैं जो 9 माह से ज्यादा समय से लंबित पड़ी हुई है। मामलों में पता चला है कि जिला स्तर पर इन सभी के नियुक्ति के मामले लंबित पड़े हुए हैं। अब इस मामले को संयुक्त संचालक रीवा संभाग ऊषा सिंह सोलंकी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को नोटिस जारी कर लंबित नियुक्तियां शीघ्र कराने के निर्देश दिए हैं।
यह है प्रावधान
मध्यप्रदेश शासन महिला बाल विकास विभाग मंत्रालय के 10 जुलाई 2007 के पत्र के अनुसार आवेदन प्राप्ति की अंतिम तिथि से 10 दिन के अंदर अनंतिम सूची का प्रकाशन कर दिया जाना चाहिए। लेकिन 29 जून 2021 को प्रकाशित प्रथम विज्ञापन से लगभग 9 माह से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी नियुक्ति नहीं हो सकी है।
यह है स्थिति
रीवा संभाग में 29 जनवरी 2021 को प्रकाशित विज्ञापन में आज तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 27 एवं आंगनबाड़ी सहायिकाओं के 41 व मिनी कार्यकर्ताओं के 2 पदों पर नियुक्ति होना शेष है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में सतना जिले में 4, रीवा में 5, सीधी में 9 और सिंगरौली में 9 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसी तरह से आंगनबाड़ी सहायिका में सतना में 4, रीवा में 14, सीधी में 10 व सिंगरौली में 13 पदों में नियुक्ति शेष है। इसी तरह मिनी कार्यकर्ता में सीधी में दो पदों में नियुक्ति होना शेष है।
फरवरी के विज्ञापन की नियुक्ति भी अटकी
इसी तरह से 17 फरवरी 2022 के विज्ञापित पदों में भी नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में 54, सहायिकाओं में 88 और मिनी आंगनबाड़ी में 3 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। संयुक्त संचालक के अनुसार इसमें भी प्रकाशित विज्ञापन में आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि से 1 माह से ज्यादा हो गये हैं।
चार रिमाइंडर फिर भी गंभीर नहीं
संयुक्त संचालन ने जिला कार्यक्रम अधिकारियों को दिये नोटिस में इस बात पर आपत्ति जताई है कि इस संबंध में 4 रिमाइंडर दिये जाने के बाद भी प्रगति नहीं हो सकी है। कहा है कि दोनो विज्ञापित पदों के विरुद्ध लंबित नियुक्तियां शीघ्र पूर्ण कराना सुनिश्चित करें।
जिला स्तर पर अटका है मामला
बताया गया है कि 2021 के विज्ञापित पदों के मामले में खंड स्तरीय समिति ने दावा आपत्ति निराकरण के बाद प्रकरण जिला स्तरीय समिति को भेज दिये हैं। लेकिन यहां पर मामला लंबित है। जबकि नियमानुसार जिला स्तरीय समिति में अगर कोई मामला निराकृत नहीं होता है तो उस पर कलेक्टर निर्णय लेते हैं।