
सतना। बिरसिंहपुर में स्कूली बच्चों की जीप और बस हादसे की एक दूसरी कहानी भी है। हादसे में 12 वर्षीय शिल्पी की भी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसकी खबर मलेशिया में मजदूरी करने गए उसके पिता श्रीधर को भी परिजनों ने दी। पर, बेबसी रही कि वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। जीवन में वापस लौट पाएंगे या नहीं? यह भी नहीं जानते। श्रीधर मजदूरी करने मलेशिया गए थे। बाद में दस्तावेजों के चक्कर में ऐसे फंसे की लौटकर वापस नहीं आ पाए।
2010 में चेन्नई के रास्ते मलेशिया पहुंचे
श्रीधर ने पत्रिका से फोन पर बताया कि उनकी दो बेटियां थी। जब शिल्पी चार साल और मुस्कान दो साल की थी तो घर की स्थिति खराब होने से परेशान रहते थे। उसी दौरान विदेश में मजदूरी करने की सलाह एक पहचान के व्यक्ति ने दी। उसके माध्यम से उप्र के एक एजेंट से संपर्क हुआ। फिर पासपोर्ट व वीजा बना। बेहतर भविष्य के सपने लिए अक्टूबर 2010 में चेन्नई के रास्ते मलेशिया पहुंचे।
कहा कि नौकरी तलाशनी होगी
वहां एक व्यक्ति ने रिसीव किया और एक जगह ले जाकर ठहरा दिया। इसके बाद पहला झटका तब लगा जब रिसीव करने वाले व्यक्ति ने कहा कि नौकरी तलाशनी होगी। रहने व खाने के पैसे चुकाने होंगे। जबकि, पैकिंग प्लांट में नौकरी का लेटर देकर भेजा गया था। करीब एक सप्ताह बाद नौकरी तलाश पाए। लेकिन, संबंधित कंपनी के प्रबंधन ने पासपोर्ट व वीजा अपने पास रख लिया।
लेकिन पासपोर्ट की डेट खत्म
वेतन जो देने को कहा गया, वह भी नहीं दिया गया। इस तरह कंपनी के लिए बंधुआ मजदूर हो चुके थे। करीब 6 माह तक अपने दस्तावेज लेने के प्रयास करते रहे पर नहीं मिला। अंत में नौकरी छोड़ दी। फिर कंपनी के एक व्यक्ति को रिश्वत दी तब उसने चोरी से वीजा-पासपोर्ट लौटाया। वे वापस आने का प्रयास करने लगे लेकिन पासपोर्ट की डेट खत्म हो चुकी थी। इस तरह से वे मलेशिया में फंसे हुए हैं।
वर्ष 2010 में मलेशिया गए। तब से आज तक वापस लौटकर नहीं आ पाए। बेटी शिल्पी 12 साल व मुस्कान 10 साल की हो गईं। गुरुवार को सड़क हादसे की दोनों शिकार हुईं। इसमें शिल्पी की मौत हो गई है और मुस्कान गंभीर रूप से घायल है। उसका उपचार सतना के बिरला अस्पताल में चल रहा है।
अब कुछ नहीं बचा
श्रीधर कहते हैं कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए खुद को संकट में डाला था। हादसे में एक बिटिया की मौत हो गई, दूसरे की स्थिति भी गंभीर है। मेरे लिए जीवन में कुछ नहीं बचा। कोशिश है कि किसी तरह भारत लौट आऊं।
और बंधक बनकर रह गए
श्रीधर कहते हैं, मलेशिया में बंधक बनकर रह गए हैं। दस्तावेज पूरे नहीं हो पा रहे हैं। वे समय-समय पर एजेंटों को संपर्क करते हैं। वे भी उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं। पैसा लेते हैं, लेकिन काम नहीं करते। करीब डेढ़ से दो लाख रुपए एजेंटों दे चुके हैं। उनकी मानें तो भारत के अलावा बांग्लादेश व पाकिस्तान तक के एजेंट से संपर्क किए कि किसी तरह भारत लौट जाएं। अब वे छिप-छिपकर मलेशिया में रहते हैं और काम के लिए भटकते हैं। कहीं काम मिलता है, तो करते हैं। कई बार सप्ताह के सप्ताह गुजर जाते हैं पर काम नहीं मिलता है।
फोन ही सहारा
वे बताते हैं कि समय निकालकर परिवार से बात करते हैं। इसके लिए स्मार्टफोन ही सहारा बनता है। उनके घर में स्मार्टफोन नहीं है। लिहाजा, गांव के लोगों के माध्यम से परिवार में संपर्क करते हैं।
बिरसिंहपुर में निकला कैंडल मार्च
हादसे में छह बच्चों समेत सात की मौत के बाद बिरसिंहपुर और आसपास इलाके के लोगों ने शुक्रवार की शाम कैंडल मार्च निकाला। कस्बा में भ्रमण करते हुए कैडल मार्च में शामिल लोगों ने पार्वती मंदिर में एकत्र होकर मृतात्मा को शांति देने की प्रार्थना की है। इसके साथ ही इस घड़ी में पीडि़त परिवारों को दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की गई।
स्कूल संचालिका, जीप मालिक, बस चालक आरोपी
सभापुर थाना पुलिस ने गुरुवार को हुए हृदय विदारक हादसे के बाद अपराध कायम कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। हादसे में पुलिस ने अपराध क्रमांक 295/18 में धारा 304, 308 आइपीसी का केस दर्ज कर लकी कॉन्वेंट स्कूल की संचालिका रश्मि श्रीवास्तव निवासी कृष्ण नगर सतना, बस चालक लालमन सेन निवासी सेमरिया जिला रीवा, जीप (स्कूल वेन) मालिक रवि श्रीवास्तव निवासी कृष्ण नगर सतना को आरोपी बनाया है। अब पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। इसके साथ ही विवेचना में वाहनों के परमिट व फिटनेस व वाहन चालक के लाइसेंस के बारे में भी तथ्य शामिल किए जाएंगे।