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एमपी में फिर एक बाघ की मौत, करंट से शिकार के बाद जंगल में दफनाया शव!

सतना जिले के सरभंगा इलाके में बाघ का शिकार हो गया। घटना की जानकारी दो माह बाद सामने आई है। शिकारियों ने शव को जंगल में दफन कर दिया था। मामले में वन विभाग का चौकीदार भी संदेही है।
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सतना। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में एक बार फिर बाघ की मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र में जंगली सूअर के शिकार के लिए बिछाए गए करंट वाले तार की चपेट में आने से एक बाघ की मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने वन विभाग की नजरों से बचने के लिए बाघ के शव को जंगल के भीतर गड्ढा खोदकर दफना दिया। करीब दो महीने तक यह राज दबा रहा, लेकिन मुखबिर की सूचना के बाद पूरा मामला सामने आ गया। वन विभाग अब मौके पर खुदाई कर बाघ के अवशेष निकालने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में जुटा है। इस मामले में वन विभाग का चौकीदार भी संदेह के दायरे में है।

पांच दिन की सुरागरशी

वन विभाग को पांच-छह दिन पहले सूचना मिली थी कि मझगवां क्षेत्र में बाघ का शिकार कर उसका शव गायब कर दिया गया है। विभाग के पास चैंलेंज था कि यह जानकारी अगर बाहर निकली तो साक्ष्य नष्ट न कर दिए जाएं। लिहाजा इस पूरी जांच और तलाशी के दौरान सतर्कता बरती गई। जब घटनाक्रम की पुष्टि हो गई तो 2 जुलाई को डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता दल तथा वन परिक्षेत्र मझगवां के अधिकारियों और अमले ने पूरे क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान चलाया। हालांकि लगातार बारिश और घने लैंटाना के जंगल के कारण उस दिन बाघ का शव या उसके अवशेष नहीं मिल सके।

चौकीदार पर संदेह के बाद खुला राज

इसी बीच 2 जुलाई की रात मुखबिर ने सुरक्षा में लगे स्थानीय चौकीदार के भी घटना में शामिल होने की सूचना दी। इसके बाद 3 जुलाई को दो चौकीदारों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले जंगली सूअर के शिकार के उद्देश्य से बिजली का तार बिछाया गया था। उसी करंट की चपेट में आकर बाघ की मौत हो गई। घटना के बाद शव को जंगल के अंदर ले जाकर गड्ढा खोदकर दफना दिया गया, ताकि किसी को इसकी जानकारी न मिल सके। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने वह स्थान भी बताया, जहां बाघ को दफनाया गया था। वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर खुदाई शुरू कर दी है। अवशेष बरामद होने के बाद उनका परीक्षण कराया जाएगा और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

किसने लगाया करंट

वन विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि करंट का तार किसने लगाया, घटना के बाद शव को ठिकाने लगाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल थे। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

इसलिए गंभीर है मामला

बाघ का शव छिपाने के लिए जंगल में दफनाने का आरोप।

घटना करीब दो महीने पुरानी बताई जा रही है।

करंट से बाघों की मौत के मामले पहले भी प्रदेश में सामने आ चुके हैं।

मध्यप्रदेश में 2025 में बाघों की रिकॉर्ड मौतें दर्ज हुई थीं और 2026 में भी अस्वाभाविक मौतों का सिलसिला चिंता का विषय बना हुआ है।

फिर चर्चा में आया सरभंगा

सरभंगा वन क्षेत्र में काफी संख्या में बाघ है। यहां पर लगभग दो दर्जन बाघ होने की बात खुद वन विभाग स्वीकार कर चुका है। इसे देखते हुए सरभंगा टाइगर सेंचुरी का प्रस्ताव भी वन विभाग ने भेजा था। लेकिन स्थानीय विधायक और सतना सांसद ने इसमें सहमति नहीं दी। जिससे यह सेंचुरी नहीं बन सका। अगर सेंचुरी बन गया होता तो यहां शिकार की घटनाएं नहीं हो पाती। इस मांग को लेकर कई बड़े जन आंदोलन भी हो चुके हैं। इस घटना के बाद फिर यह मुद्दा गरमा रहा है। उल्लेखनीय है इस क्षेत्र में पहले भी वन्य प्राणियों के शिकार की कई घटनाएं सामने आ चुकी है। अब सरकार और वन विभाग को सोचने की जरूरत महसूस की जा रही है।